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एआई पर बढ़ती निर्भरता से बढ़ रही डिजिटल थकान

एआई पावर्ड (AI-Powered) स्टडी प्लेटफॉर्म और वर्चुअल डिस्कशन ने आज के छात्रों की पढ़ाई को जितना आकर्षक और सुलभ बनाया है, उसके साथ ही एक नया संकट भी खड़ा कर दिया है। इंजीनियरिंग के छात्र सुमित का उदाहरण लें, जिसकी पढ़ाई अब रील्स, शॉर्ट्स और ऑनलाइन लेक्चर्स के इर्द-गिर्द सिमट गई है। लेकिन जब वह किताब पढ़ने बैठता है, तो उसका ध्यान बार-बार फोन के नोटिफिकेशन पर चला जाता है और पढ़ी हुई चीजें याद रखने में उसे कठिनाई होने लगी है।

 

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यही हाल आईटी प्रोफेशनल सायमा का है, जो एआई प्रोडक्टिविटी टूल्स के लगातार आने वाले अलर्ट्स, रिमाइंडर्स और परफॉर्मेंस रिपोर्ट्स की आपाधापी से ‘डिजिटल बर्नआउट’ (मानसिक थकान) की शिकार हो चुकी हैं। इस चक्रव्यूह से बचने के लिए अब दोनों ही गैर-जरूरी नोटिफिकेशन्स को बंद करने और स्क्रीन टाइम को सीमित करने जैसे कदम उठाने को मजबूर हैं।

सोचने और निर्णय लेने की क्षमता पर एआई का प्रहार

वर्षों से लोग ईमेल और चैट ऐप्स के नोटिफिकेशन्स से काम में बाधा की शिकायत करते रहे हैं, जिससे तनाव और थकान बढ़ती है। लेकिन अब एआई टूल्स के आने से यह समस्या एक नए स्तर पर पहुंच गई है।

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तार्किक क्षमता कमजोर होना: वर्कफ्लो टिप्स, एआई प्रॉम्प्ट्स, प्रिडिक्टिव टेक्स्ट और सिस्टम जेनरेटेड सुझावों (AI Suggestions) के कारण लोग खुद दिमाग दौड़ाने के बजाय रेडीमेड उत्तरों पर निर्भर होने लगे हैं। इससे विचारों के मंथन की वह आदत छूट रही है, जो किसी भी तार्किक निर्णय के लिए सबसे अनिवार्य है।

रचनात्मक विरोधाभास (Creative Paradox): पहले लोग किसी भी जानकारी को हासिल करने के बाद उसके स्रोतों और तथ्यों की जांच करते थे। अब एआई टूल्स एक सीधा और स्पष्ट जवाब देते हैं, जिसके सही होने की कोई गारंटी नहीं होती। शोध बताते हैं कि एआई पर बहुत अधिक निर्भरता से इंसानी रचनात्मक सोच एक ही ढर्रे पर अटक जाती है, जिससे नए या मौलिक समाधान खोजने की प्रवृत्ति कम होने लगती है।

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अनंत स्क्रॉलिंग और प्रोडक्टिविटी बढ़ने का ‘भ्रम’

आधुनिक टेक्नोलॉजी और एआई टूल्स का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें ‘ब्रेक’ या ‘एंड पॉइंट’ जैसा कोई ठहराव नहीं होता।

स्वाभाविक ठहराव का अंत: सोशल मीडिया पर स्क्रॉलिंग की कोई सीमा नहीं है। इसका एल्गोरिदम यूजर को लगातार नए कंटेंट के साथ उलझाए रखता है। किताबों के पन्ने पलटने जैसा स्वाभाविक ठहराव इस डिजिटल व्यवस्था में पूरी तरह गायब है।

एआई जनित निरंतरता: लगातार जमा होते ईमेल, आते हुए मैसेजेस और एआई द्वारा तैयार किए जा रहे काम के अनगिनत रूप इंसान को पूरे दिन व्यस्त रखते हैं। यह व्यस्तता इसलिए नहीं होती कि काम अनिवार्य है, बल्कि इसलिए होती है क्योंकि तकनीक का प्रवाह निरंतर है। नतीजा यह हो रहा है कि इंसानी मस्तिष्क अब आसान सवालों के जवाब के लिए भी संघर्ष करने लगा है।

डिजिटल थकान (Digital Fatigue) बढ़ाने में एआई के 5 मुख्य हथियार

बेंगलुरु स्थित टेक कंसल्टेंसी फर्म प्लस91लैब्स (Plus91Labs) के सह-संस्थापक प्रशांत राणा के अनुसार, एआई जनित डिजिटल थकान के पीछे पांच प्रमुख कारण काम कर रहे हैं।

पहला कारण पर्सनलाइज्ड कंटेंट है, जिसमें एआई सिस्टम यूजर के व्यवहार और पसंद के आधार पर कंटेंट परोसता है, जिससे स्क्रीन टाइम खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है।

दूसरा कारण लगातार स्क्रॉलिंग है, जिसमें रुचि के अनुसार लगातार नया और आकर्षक कंटेंट सप्लाई होता रहता है, जिससे मिनटों के बहाने गए यूजर्स के घंटों बीत जाते हैं।

तीसरा कारण इन्फॉर्मेशन ओवरलोड है, जिसमें न्यूज, वीडियो, ब्लॉग और विज्ञापनों की आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण दिमाग में अनावश्यक सूचनाओं की बाढ़ आ जाती है, जो अनिर्णय की स्थिति पैदा करती है।

चौथा कारण नोटिफिकेशन ओवरलोड है, जिसमें पूरे दिन एआई ऐप्स से मिलने वाले पर्सनलाइज्ड सुझाव और प्रोमोशनल अलर्ट्स जरूरी कामों से ध्यान पूरी तरह भटका देते हैं।

पांचवां कारण फोमो (FOMO) है, जिसमें रीयल-टाइम और ट्रेंडिंग अपडेट्स से वंचित रह जाने का डर (Fear of Missing Out) यूजर्स को स्क्रीन से चौबीसों घंटे चिपकाए रखता है।

समाधान: एआई टूल्स का करें विवेकपूर्ण प्रयोग

चिंता की बात यह नहीं है कि एआई इंसानी रचनात्मकता के लिए चुनौती है, बल्कि असली चिंता यह है कि इस पर अत्यधिक निर्भरता हमारी स्वतंत्र सोच, जिज्ञासा और कुछ नया खोजने की आदत को खत्म कर रही है। एआई का उपयोग एक ‘टूल’ की तरह होना चाहिए जो इंसानी सोच की क्षमता को बढ़ाए, न कि उसे सीमित कर दे। भविष्य में सफलता के लिए तकनीकी तीव्रता के साथ-साथ कल्पनाशीलता, निर्णय क्षमता और रचनात्मकता जैसे मानवीय गुणों का संतुलन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

बर्नआउट से बचने के लिए कुछ बेहद उपयोगी उपाय

अनावश्यक नोटिफिकेशन्स को तुरंत टर्नऑफ करें: इससे काम के दौरान बार-बार ध्यान नहीं भटकेगा और मानसिक बोझ हल्का होगा।

गैजेट्स से नियमित ब्रेक लें: लगातार स्क्रीन देखने से बचने के लिए हर आधे से एक घंटे में अपनी सीट से उठें और आंखों को आराम दें।

सीमित और उपयोगी ऐप्स का प्रयोग: अपने फोन या सिस्टम से उन सभी ऐप्स को हटा दें जो उत्पादकता के बजाय सिर्फ समय बर्बाद करते हैं।

‘नो-डिवाइस’ टाइम तय करें: दिन का कुछ समय, विशेषकर सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से पहले के कुछ घंटे पूरी तरह से डिजिटल डिवाइसेस से दूर रहें।

एआई का समझदारी भरा इस्तेमाल: एआई का उपयोग केवल अपनी कार्यक्षमता (Productivity) को सपोर्ट देने के लिए करें। अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ही टूल्स की नोटिफिकेशन सेटिंग्स और रिकमेंडेशन सिस्टम को कस्टमाइज करें।</p

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