संत-महंत बोले : उज्जैन में ही हो मुख्यालय

यूआईएमआर नामकरण एवं मुख्यालय उज्जैन में रखने का मुद्दा

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सदी के तीसरे सिंहस्थ की तैयारी में उज्जैन में जुटा हुआ है। संत-महंत भी इसमें अपना योगदान दे रहे हैं। इस बीच उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (यूआईएमआर) को लेकर उठे विवाद से वे भी आहत हैं। उज्जैन की पौराणिकता, ऐतिहासिकता को देखते हुए वह यूआईएमआर नामकरण को ठीक बता रहे हैं। वह अथॉरिटी का मुख्यालय उज्जैन में रहने के पक्ष में भी हैं।
उज्जैन संभाग के चार जिले (रतलाम, देवास, शाजापुर और उज्जैन) व इंदौर संभाग के दो जिले (इंदौर, धार) की 38 तहसीलों को मिलाकर यूआईएमआर बनाया जा रहा है। यह प्रदेश का पहला मेट्रोपॉलिटन होगा। इसका मुख्यालय उज्जैन में बनाया जाएगा। मुख्यालय उज्जैन में बनाए जाने से विकसित इंदौर के लोग नाराजगी जता रहे हैं, वह ऐसा प्रदर्शित कर रहे हैं, जैसे इंदौर की उपेक्षा हो रही है। हालांकि, उज्जैन वाले ऐसा नहीं मान रहे हैं। उनका मानना है कि मेट्रोपॉलिटन बनने से अकेेले उज्जैन का विकास नहीं होगा, इससे सभी छह जिले विकसित होंगे। यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन में रखने पर संत-महंत भी सहमत हैं। उनका कहना है कि उज्जैन पौराणिक और आध्यात्मिक शहर है, ऐसे में मुख्यालय यहीं होना चाहिए।
उज्जैन को उसका हक मिलना चाहिए
उज्जैन धार्मिक और पौराणिक नगर है। यहां बाबा महाकाल हैं, मां हरसिद्धि हैं। यह सप्तपुरियों में आता है। हर साल करोड़ पर्यटक उज्जैन आते हैं। उज्जैन में सिंहस्थ होता है। ऐसे में यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन में ही रखना चाहिए।
महेश पुजारी
पुजारी, महाकाल मंदिर
इंदौर काफी विकसित हो चुका है। उज्जैन का विकास तो अब शुरू हुआ है। उज्जैन धार्मिक नगरी है। पर्यटन नगरी है। हर साल यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। उद्योग भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में उज्जैन को और विकसित करने की जरूरत है। यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन में होने से विकास में मदद मिलेगी।
डॉ. रामेश्वर दास
अध्यक्ष, रामा दल परिषद उज्जैन
उज्जैन में हर साल पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। श्रद्धालु भी बढ़ रहे हैं। सिंहस्थ में भी इस बार ३० करोड़ से ज्यादा लोगों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन में ही रखना चाहिए। इससे उज्जैन को और बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकेगा।
महंत मंगलदास
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन
यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन में ही होना चाहिए। उज्जैन इसके लिए डिजर्व करता है। उज्जैन के पास बाबा महाकाल हंै, मां हरसिद्धि हैं, कालभैरव हैं, महर्षि सांदीपनि आश्रम है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक भी आ रहे हैं, ऐसे में मुख्यालय उज्जैन में ही होना चाहिए।
महंत सत्यानंद जी
श्री पंचायती अखाड़ा, बड़ा उदासीन
यूआईएमआर को हाईकोर्ट में चुनौती डबल बेंच करेंगे सुनवाई
उज्जैन। उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (यूआईएमआर) गठन को हाईकोर्ट इंदौर की डबल बेंच में चुनौती दी गई है। इस संबंध में अभिभाषक अक्षय पहाडिय़ा ने याचिका दायर की है। कोई ने याचिका स्वीकार कर ली है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की बेंच इस मसले पर सुनवाई करेगी।
अभिभाषक पहाडिय़ा ने याचिका में नगरीय निकाय अधिनियम में हुए 74 वें संशोधन के अनुच्छेद 14 को याचिका में आधार बनाया है। यह निकायों के विकास के लिए एक स्वतंत्र परिषद के गठन की बात कहता है। उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन बनने पर इसके दायरे में आने वाले नगरीय निकाय अप्रभावी हो जाएंगे।









