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उज्जैन के व्यापारी बोले- शहर को अब मिल रहा है उसका हक

यूआईएमआर नामकरण और मुख्यालय विवाद

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (यूआईएमआर) में उज्जैन का नाम आगे और इसका मुख्यालय उज्जैन में रखने पर छिड़े विवाद को शहर के व्यापारी ठीक नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि उज्जैन जिस विकास का हकदार था, वह उसे पहले कभी नहीं मिला। अब जब उज्जैन जैसे प्राचीन शहर को उसका हक मिल रहा है तो किसी अन्य को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

प्रदेश का पहला मेट्रोपॉलिटन रीजन उज्जैन, इंदौर, धार, देवास, शाजापुर और रतलाम जिले की 38 तहसीलों को मिलाकर बनाया जा रहा है। इसका मुख्यालय उज्जैन में रहेगा।यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन में रखने और नाम आगे रखने पर इंदौर के लोगों को आपत्ति है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस विषय पर मोर्चा खोला था। उज्जैन के व्यापारी चाहते हैं कि यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन ही हो।

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बाबा महाकाल विश्व की पहचान, उनकी नगरी पर नाम होने पर आपत्ति क्यों ?

बाबा महाकाल विश्व की पहचान है। वह उज्जैन में बसते हैं। उनके कारण उज्जैन का नाम भारत ही नहीं विश्व में प्रसिद्ध है। ऐसे में उज्जैन का नाम आगे होना ही चाहिए। मुख्यालय भी उज्जैन ही होना चाहिए। इस पर किसी को आपत्ति भी नहीं होनी चाहिए।
-प्रकाश आच्छा
सचिव, बर्तन व्यापारी एवं निर्माता संघ

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नाम और मुख्यालय को लेकर खड़ा किया जा रहा विवाद व्यर्थ का है। उज्जैन को पहली बार उसका हक मिल रहा है। उज्जैन वैसे भी विश्व भर में ख्यात है। ऐसे में किसी को नाम और मुख्यालय उज्जैन में रखने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उज्जैन पहले बड़ा गांव कहलाता है, अब शहर हुआ, अब यह महानगर बनने जा रहा है। जलने वाले जलते रहेंगे, बाबा महाकाल उज्जैनवालों के साथ हैं।
-आलोक अग्रवाल
अध्यक्ष विक्रमादित्य क्लॉथ मार्केट दलाल एसोसिएशन

उज्जैन पुराना शहर है। ऐसा कई बार हुआ, जब उज्जैन का हक मारकर किसी और शहर को दे दिया गया। उज्जैन धार्मिक और पौराणिक नगरी है। यहां बाबा महाकाल हैं। मां हरसिद्धि हैं। इंदौर के लोगों को तो यूआईएमआर गठन का स्वागत करना चाहिए कि पहली बार किसी सीएम ने मेट्रोपॉलिटन बनाने की तो सोची।
-अनिल राठौर
सचिव फ्रीगंज व्यापारी महासंघ

उज्जैन देश ही नहीं दुनिया का सबसे प्राचीन शहर है। कम से कम ५ हजार साल पुराना। ऐसे मेंं शहर को यूआईएमआर का मुख्यालय बनाना अच्छी बात है। इंदौर को तो हमेशा से प्राथमिकता दी गई। लेकिन उज्जैन का हक हमेशा मारा गया। अब जब उज्जैन को उसका हक मिल रहा है तो लोग आपत्ति क्यों ले रहे हैं। लोगों को इसमें सहयोग करना चाहिए।
-विजय अग्रवाल
अध्यक्ष नईपेठ व्यापारी एसोसिएशन एवं संचालक यूडीए

उज्जैन पुराने जमाने में कई राजाओं की राजधानी रही है। विक्रमादित्य, अशोक इनमें उल्लेखनीय है। यह प्राचीन नगरी भी है। भौगोलिक रूप से भी उज्जैन इंदौर से ज्यादा सक्षम है। ऐसे में मुख्यालय उज्जैन में रखने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हमें काम देखना चाहिए, ना कि नाम के पीछे भागना चाहिए। सीएम डॉ. मोहन यादव मेट्रोपॉलिटन बना कर बड़ा काम कर रहे हैं।
-जितेंद्र अग्रवाल
अध्यक्ष अनाज-तिलहन व्यापारी संघ

यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन में ही होना चाहिए। उज्जैन विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। अभी छोटी-छोटी बातों के लिए उज्जैन वालों की निर्भरता इंदौर पर रहती है। उज्जैन को मेट्रोपॉलिटन का मुख्यालय बनाना बड़ी बात है। इंदौरवालों को भी इसका स्वागत करना चाहिए। दोनों शहर एक दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरा अधूरा है।
-अजय रोहरा
अध्यक्ष दौलतगंज होलसेल किराना मर्चेट एसोसिएशन

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