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अनंताय रिसोर्ट में अनूठी क्लास शुरु, दस दिनों तक रहेंगे 165 साधक आर्य मौन

साधना : 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर से गुरु-शिष्य परंपरा से मिली शिक्षा से आम आदमी को दीक्षित कर रहे हैं जैनाचार्य जिनचंद्र सूरिजी महाराज

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। देवासरोड स्थित अनंताय रिसोर्ट में दस दिन की अनूठी क्लास शुरू हो चुकी है। देश के कोने-कोने से आए 165 प्रतिभागी जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर से मिली मौन साधना का मर्म यहां सीख रहे हैं। यह क्लास इस लिए अलग है कि इसमें एक ही कमरे में 2 से 3 प्रतिभागी 10 दिन तक साथ रहेंगे लेकिन वह ना तो बोलेंगे, ना ही मोबाइल का उपयोग करेंगे। 16 अगस्त को जब यह मौन तोड़ेंगे तो एक गहरी आत्मिक शांति से भरे होंगे। शिविर की खास बात यह है कि दस दिन तक लगने वाली क्लास पूरी तरह नि:शुल्क है। यानी ठहराना, खाना-पीना से लेकर कपड़ों की धुलाई तक पर एक रुपया भी खर्च शिविरार्थी का नहीं होगा।

दरअसल, नाल (बीकानेर) जैनाचार्य जिनचंद्र सूरिजी 1 हजार साल पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शिविरार्थियों को आर्य मौन से रूबरू करा रहे हैं। दावा है कि सत्य साधना वाला यह शिविर 10 हजार से ज्यादा लोगों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाया है।

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क्यों है शिविर खास, बताया जैनाचार्य ने

अक्षरविश्व को जिनचंद्र सूरिजी महाराज ने बताया कि आर्य मौन साधना सिखने आए शिविरार्थी दस दिन न सिर्फ मौन रहेंगे, बल्कि वह मोबाइल का उपयोग भी नहीं कर सकेंगे। यह मौन इस तरह होगा कि एक भी शिविरार्थी इशारे से या कागज पर भी अपनी बात कर/ लिख नहीं सकेगा। एक कमरे में दो से तीन शिविरार्थी रहेंगे लेकिन आमने-सामने होने पर भी यह बात नहीं कर सकेंगे। आमने-सामने की स्थिति अगर बनी तो नजरें झुकाकर यह चलेंगे

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शिविरार्थियों का चयन त्रिस्तरीय काउंसिलिंग से
165 शिविरार्थियों का चयन तीन स्तरीय काउंसिलिंग के जरिये किया गया है। पहली और दूसरी काउंसिलिंग फोन पर की गई थी, जबकि तीसरी प्रत्यक्ष मिलकर। जिनचंद्र सूरिजी महाराज ने कहा यह दस दिनी सत्य साधना ध्यान शिविर अंतर्मुखी होने की विद्या है। 1 हजार साल पुरानी यह शिक्षा गुरु-शिष्य परंपरा से आगे बढ़ रही है। उन्हें भी 39 वें आचार्य विजेंद्र सूरि जी ने दीक्षित किया था।

गुस्से से छुटकारा दिलाकर आत्मीय चेतना जगाना मकसद
जिनचंद्र सूरिजी के अनुसार पहले आर्य मौन साधना के लिए संत- महात्मा जंगलों में जाते थे। इस साधना से वह सद्गुण से भर जाते थे। अब जंगल-वन बचे नहीं तो यह साधना सबके बीच की जा रही है। वह कहते हैं कि क्षमा से हम पूरी जिंदगी जी सकते हैं, लेकिन गुस्से से भरे होने पर एक दिन भी गुजारना मुश्किल होता है। यह शिविर हमारे भीतर और बाहर के दुर्गुणों के प्रभाव को समाप्त करता है और सदगुणों का प्रभाव बढ़ाता है। अंतिम दिन कृतज्ञता दिवस होता है। मप्र में यह 12 वां और उज्जैन का दूसरा शिविर है। २०१७ में जयसिंहपुरा रोड स्थित मानसिंगका धर्मशाला में शिविर लगाया गया था।

राजनेता-विद्यार्थियों के लिए मौन जरूरी
जैनाचार्य ने कहा कि हमारे राजनेताओं और विद्यार्थियों को आर्य मौन साधना जरूरी सीखनी चाहिए, अगर हमारे राजनेताओं ने यह साधना सीखी होती तो जंतर-मंतर(जेन-जी प्रोटेस्ट) पर ऐसे हालात बनते ही नहीं। हम चाहते हैं कोटा सहित देश में कोचिंग सेंटर चलाने वाले संचालक अपने स्टूडेंटस को दस दिनी मौन साधना सिखाएं तो डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी घटनाएं थम सकती हैं।

भारत में धर्म का प्रभाव, तभी तो दुनिया से अप्रभावित
जैनाचार्य ने कहा कि भारत में धर्म का प्रभाव है, यही कारण है कि वैश्विक उथल-पुथल ( युद्ध, उन्माद और अशांति के हालत) के बीच भी भारत बचा हुआ है। उनका कहना है भीषण तनाव और अनैतिकता के वातावरण के बाद भी लोग यदि भारत में आराम से जिंदगी बिता रहे हैं तो यह धर्म का ही प्रभाव है। हालांकि जैनाचार्य कहते हैं कि यदि धर्म का इस्तेमाल राजनीति के मुताबिक किया जाता है तो फिर वह धर्म नहीं रहता, अधर्म हो जाता है। उनके मुताबिक धर्म का स्वभाव तो खुद से परिचित होना है, मैत्री के साथ रहना ही हमारा स्वभाव है, जितना हो सके लोगों का भला करें। दुर्भाग्य है कि मौजूदा दौर में राजनेता अपने स्वार्थ मुताबिक धर्म की व्याख्या कर रहे हैं।

महाराज श्री से चर्चा के दौरान माधव साइंस कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शीलचंद जैन, रिसोर्ट के ऑनर दिनेश जैन हाईकमान, व्यवस्थापक अजय धारीवाल भी मौजूद थे।

नाल में हर महीने-कोलकाता में दो बार शिविर

जैनाचार्य जी के साथ उनकी सचिव शालिनी लोढ़ा भी आई हुई हैं। वह बीकानेर में कुशलायत- जैन यति गुरुकुल संस्थान, सत्य साधना केंद्र संचालित करती हैं। उन्होंने बताया कि नाल में साधना केंद्र के साथ पहली से 8वीं तक का स्कूल भी संचालित किया जाता है। डे-बोर्डिंग वाले इस स्कूल में हर दिन की शुरुआत ध्यान से होती है।आर्थिक रूप से कमजोर 25 फीसदी बच्चों को नि:शुल्क तथा शेष 75 प्रतिशत बच्चों को न्यूनतम शुल्क पर शिक्षा दी जाती है।

स्कूल में अभी 320 बच्चे हैं। यह सेंटर 1979 से चल रहा है। इस वजह से ग्रामीणों के बच्चों को बेस्ट एजुकेशन मिल रहा है। उज्जैन में ध्यान केंद्र शुरू करने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। सत्य साधना केंद्र १० से लेकर ४५ दिन के शिविर संचालित करता है। नाल में हर महीने शिविर लगता है, जबकि कोलकाता में साल में दो बार शिविर लगता है। 10 से 45 दिन के आर्य मौन साधना शिविर में शामिल होने वाले साधकों के आवास से लेकर भोजन तक की व्यवस्था नि:शुल्क रहती है। शिविर के नियम कड़े हैं लेकिन समाज का बंधन नहीं है।

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