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मूंगफली-मक्का बोई, फसल आने से पहले ही खेत बुक

लगातार सोयाबीन बोने से घट रहा उत्पादन, किसानों को कृषि विभाग ने दी फसल बदलने की सलाह

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। लगातार सोयाबीन की बोवनी के कारण इसके उत्पादन में कमी आ रही है। कृषि विभाग इसके लिए किसानों को मूंगफली और मक्का की खेती की सलाह दे रहा है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिक खेती के साथ फसल विविधीकरण पद्धति अपनाकर किसान खेती को मुनाफे में बदल सकते हैं। इसी सिलसिलें में मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत ग्राम हरसोदन गए कलेक्टर रौशनकुमार सिंह और जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने उन खेत का निरीक्षण किया, जिनके मालिकों को आत्मा योजना के तहत प्राकृतिक खेती के तहत बीज प्रदान किए थे।

कलेक्टर- सीईओ ने मूंगफली और मक्का की फसल देखी तथा उत्पादन, लागत और आय पर चर्चा की। किसान कमल पाटीदार ने बताया वे चार वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर सोयाबीन के स्थान पर मक्का और मंूगफली की फसल ली है। फसल तैयार होने से पहले ही मूंगफली बुक हो गई है। मक्का के भुट्टे भी खेत से सीधे बेच रहे हैं जिससे परिवहन और मंडी तक ले जाने के खर्च भी बच रहा है।

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किसान पाटीदार ने बताया मूंगफली से प्रति बीघा लगभग 7 से 10 क्विंटल उत्पादन मिलने की संभावना है। वर्तमान में बाजार भाव 7 से 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल है। इस हिसाब से प्रति बीघा 30 से 35 हजार रुपए की आय की संभावना है। मक्का के भुट्टे भी 20 रुपए किलो बिक रहे हैं। जबकि सोयाबीन से प्रति बीघा अधिकतम आय 10 से 12 हजार रुपए बीघा होती थी।

कृषि सहायक संचालक कमलेश राठौड़ ने बताया फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती तथा बाजार की मांग के अनुसार फसल का चयन कर किसान आय बढ़ा सकते हैं। खेत से सीधे उपभोक्ता तक उपज पहुंचने से बिचौलियों एवं परिवहन संबंधी खर्च में कमी आती है और किसान को उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।

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निरीक्षण के दौरान कृषि विभाग के उप संचालक केएस कैन, सहायक संचालक कमलेश राठौर, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सुबोध पाठक एवं कृषि विस्तार अधिकारी महेंद्र आंजना उपस्थित थे।

इल्ली की प्रकोप तो नहीं है
जिले में 5.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की फसलें बोई गई हैंंं। इसमें सोयाबीन का रकबा 5.06 हेक्टेयर है। कृषि विभाग के अनुसार फसल 50 से 55 दिन की हो गई है। किसान देखें कि इल्ली या कीट का प्रकोप तो नहीं है। एक वर्ग मीटर में 3-4 इल्लियां दिखें तो कीटनाशक स्प्रे करें। गर्डल बीटल रिंग कटर प्रभावित पौधे दिखें तो प्रारंभिक स्थिति में ही उखाड़कर फेंक दें। जिला डायग्नोस्टिक दल और मैदानी कृषि अधिकारी भ्रमण कर रहे हैं।

किसानों को जानकारी दी जा रही है। कीटनाशक स्प्रे के लिए किसानों ने प्रमुख कीटनाशकों के नाम भी सुझाए हैं। किसानों को सलाह दी है कि वे उर्वरक, बीज, कीटनाशक कुछ भी सामग्री खरीदें तो दुकान से पक्का बिल अवश्य लें। सोयाबीन की फसल में पक्षियों के बैठने के लिए टी आकार के बर्ड प्रचेस लगाएं जिसपर पक्षी बैठकर सोयाबीन के हानिकारक कीट इल्ली खाएंगे जो किसानों के लिए लाभकारी होगा।

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