सवारी में बैंड की स्वर लहरियां सुन बरसों पुराने दौर की यादें ताजा हुईं

7.80 लाख ने किए सवारी दर्शन, थीम के मुताबिक शामिल हुए अलग-अलगबैंड ने जमाया रंग
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सावन के तीसरे सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी में थीम के मुताबिक शामिल बैंडस ने रंग जमा दिया। भजनों की सुमधुर धुन बजा रहे अलग-अलग बैंड ने सवारी के पारंपरिक स्वरूप की याद ताजा कर दी। एक दौर ऐसा भी था जब सवारी में सिर्फ बैंड और उनके गायक ही सवारी का माहौल सुमधुर संगीत से आनंदमय बनाते थे। बैंड के प्रदर्शन से खुश होकर लोग उन्हें इनाम भी देते थे।
पिछले कुछ सालो से डीजे के कानफोड़ू शोर ने उस दौर को लगभग खत्म कर दिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुसार इस सोमवार जब सवारी में बैंड की धुन के साथ भजन की स्वर लहरियां गूंजी तो सवारी का पारंपरिक स्वरूप फिर नजर आने लगा। सवारी मार्ग पर लगभग 7.80 लाख से अधिक भक्तों ने भगवान श्री महाकालेश्वर के श्री चंद्रमौलेश्वर, श्री मनमहेश स्वरूप व श्री शिव-तांडव स्वरूप के दिव्य दर्शन प्राप्त किए।
सोमवार को सभा मंडप में पूजन के बाद शाम 4 बजे भगवान श्री महाकाल की पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, श्री महाकालेश्वर बैंड एवं सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने पालकी में विराजमान श्री चंद्रमौलेश्वर को गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया। सवारी मार्ग में जगह-जगह खड़े श्रद्धालुओं ने भोले शंभू-भोलेनाथ और अवंतिकानाथ की जय के गगनभेदी घोष के साथ भगवान श्री महाकालेश्वर पर पुष्पवर्षा की। मार्ग के दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोगों ने दर्शन किए।
पालकी के आगे चले बैंड
सवारी में पुलिस, आर्मी, होमगार्ड, श्री महाकालेश्वर बैंड, विभिन्न स्कूलों एवं निजी बैंडों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दीं। यह सभी दल सवारी मार्ग में अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए चले और रामघाट पर पालकी के आगमन पर अद्भुत प्रस्तुतियां दीं।
भजन मंडलियां की मधुर प्रस्तुतियां
बाबा महाकाल की सवारी के साथ भजन मंडलियां भी उत्साह और उमंग के साथ शिव भजनों की मधुर प्रस्तुतियां देते हुए चलीं। सवारी में हजारों की संख्या में भक्त झांझ, मजीरे, ढोल और भगवान के प्रिय वाद्य डमरू बजाते हुए पालकी के साथ आराधना करते हुए शामिल हुए।
सवारी परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंची, जहां मां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान का पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस पहुंची।
सवारी के आगे और पीछे रथों पर हाईटेक एलईडी लगाई गई थीं। इन लाइव एलईडी रथों के माध्यम से फ्रीगंज, दत्त अखाड़ा, नानाखेड़ा व शहर के प्रमुख मार्गों पर लाइव प्रसारण दिखाया गया, ताकि जो श्रद्धालु या उज्जैनवासी सीधे सवारी में शामिल नहीं हो सकें, वे भी चलित रथों के जरिए दर्शन का आनंद ले सकें।
अगली सवारी 24 को
मंदिर समिति के अनुसार, भगवान श्री महाकालेश्वर की चौथी सवारी 24 अगस्त को निकाली जाएगी। जिसमें पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव तथा नंदी रथ पर श्री उमा-महेश विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। सवारी की थीम पर्यावरण संरक्षण रहेगी।
12 लाख ने किए नागचंद्रेश्वर के दर्शन, शाम ६ बजे से रोकी एंट्री
रात 12 बजे तक चला दर्शन का सिलसिला
पूजन के बाद एक साल के लिए पट बंद
उज्जैन। नागपंचमी पर भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के रात 12 बजे तक करीब 12 लाख से अधिक लोगों ने दर्शन किए। रात 12 बजे विधि विधान से पूजन के बाद श्री नागचंद्रेश्वर मदिर के पट बंद कर दिए गए। अब इन्हें अगले साल नागपंचमी पर खोले जाएंगे।
श्री महाकालेश्वर के तीसरे मंजिल पर विराजित श्री नागचंद्रेश्वर के पट साल में एक बार ही खुलते हैं। सोमवार को नागपंचमी पर रिकार्डतोड़ दर्शनार्थी यहां पहुंचे। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक रात 12 बजे तक कुल 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन किए। अधिक भीड़ के कारण दिनभर लंबी कतार थी। चूंकि रात 12 बजे तक ही दर्शन कराने का विधान है इस कारण शाम 6 बजे प्रशासन ने कर्कराज पार्किंग से श्रद्धालुओं की एंट्री रोक दी, ताकि जो लोग कतार में हैें उन्हें दर्शन कराए जा सकें। पिछले वर्ष 8 लाख दर्शनार्थी आए थे। इस बार 4 लाख अधिक पहुंचे।
दोपहर 12 बजे बदला ध्वज, शाम को पुजारियो ने किया पूजन
उज्जैन। नागपंचमी पर सोमवार दोपहर 12 श्री नागचंद्रेश्वर का श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत श्री विनीतगिरी जी ने पूजन किया। नागचंद्रेश्वर का षोडशोपचार पूजन और आरती की गई। इसके बाद परंपरा का निर्वहन करते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य शिखर पर लहराने वाले ध्वज का भी विधि-विधान से पूजन किया गया और नवीन ध्वज स्थापित किया गया। शाम 6 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के पंडे पुजारियों ने श्री नागचंद्रेश्वर का पूजन-अर्चन किया।
350 से अधिक सफाई मित्रों ने संभाली सफाई की कमान
उज्जैन। सोमवार को नागपंचमी और भगवान महाकाल की सवारी के बाद सफाई का जिम्मा 350 से अधिक सफाई कर्मचारियों ने संभाला। रात 12 बजे से दर्शन व्यवस्था प्रारंभ होने के साथ ही कर्कराज पार्किंग से लेकर त्रिवेणी संग्रहालय, जयसिंहपुरा, हरसिद्धि चौराहा, हरसिद्धि पाल, रामघाट, गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, गोपाल मंदिर, गुदरी चौराहा, चौबीस खंभा और कहारवाड़ी समेत सभी प्रमुख मार्गों पर 3 शिफ्टों में 350 से अधिक सफाई मित्रों ने मोर्चा संभाला।









