Advertisement

4 महीने से चल रहा था आंदोलन, तीसरे प्रदर्शन से रुकी शिफ्टिंग

जंतर-मंतर से मिली जेन जी की पहचान का असर

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जंतर-मंतर पर अगर जेन-जी आंदोलन नहीं होता तो शासन की क्लोजर- मर्जर स्कीम के तहत सराफा कन्या हायर सेकंडरी स्कूल भी दाउदखेड़ी सांदीपनि स्कूल में शिफ्ट हो जाता। अब तक तीन स्कूल इसमें मर्ज हो चुके हैं। स्कूल की मर्जिंग के लिए खिलाफ स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने अप्रैल से लड़ाई शुरू की थी और इसका ठोस नतीजा मंगलवार को सामने आया। हालांकि अब शिफ्टिंग रोकने का सेहरा नेतानगरी अपने सिर पर बांध रही है।

दरअसल, दाउदखेड़ी में शिक्षा विभाग ने हाईटेक सांदीपनि स्कूल (सीएम राइज) दो साल पहले शुरू किया था। यहां आया पहला स्कूल महाराजवाड़ा क्रमांक-3 था, जिसे महाकाल क्षेत्र से हटाया गया था। इस सीएम राइज स्कूल के भवन में अब पर्यटन विकास निगम का होटल विक्रमादित्य तनकर खड़ा है। दाउदखेड़ी में बने 2900 से अधिक की विद्यार्थी क्षमता वाले भवन में यूं 11 स्कूलों की शिफ्टिंग होनी थी। इनमें छह उज्जैन शहर और पांच ग्रामीण क्षेत्र के हैं।

Advertisement

इनमें से अब तक महाराजवाड़ा क्रंमाक 3, नूतन माध्यमिक और महाकाल कन्या मैदान की शिफ्टिंग हो चुकी है। जबकि सराफा को इसी सत्र से यहंा मर्ज होना था। महाराज वाड़ा क्रंमाक 2 और माधवगंज हायरसेकंडरी के शिफ्टिंग आदेश अभी नहीं निकले हैं। स्कूलों को बचाने की लड़ाई की शुरुआत अप्रैल महीने में एडव्होकेट जितेंद्रसिंह सेंगर और समाजसेवी अजीतसिंह पंवार ने की थी। भगतसिंह के सपनों का भारत ग्रुप चलाने वाले इन युवाओं का सपना बच्चों को पढ़-लिखकर सुशिक्षित नागरिक बनाना है। इसी सोच को लेकर दोनों ने 62 लोगों के साथ मिलकर स्कूल बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया था। 3 मई को समिति की पहली बैठक अंकपात मार्ग स्थित बलाई समाज की धर्मशाला में हुई और स्कूल बचाने की लड़ाई लडऩे का फैसला किया गया।

3 शिफ्ट हो चुके थे, चौथे की थी बारी

Advertisement

कैसे लड़ी लड़ाई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम वर्ष शिक्षित और राममंदिर के कारसेवक रहे सेंगर बताते हैं कि लड़ाई आसान नहीं थी। लोग आगे आना ही नहीं चाहते थे। 31 मार्च 2026 को पहली बार स्कूल मर्ज होने की चर्चा चली थी।

विद्यार्थियों के परिजनों से घर-घर जाकर संपर्क किया। समिति के सदस्यों ने नागतलाई, अंबोदिया, मुरलीपुरा, मोहनपुरा, धरमबड़ला, रातडिय़ा, जयसिंहपुरा, गऊघाट का कच्चा पाला, पक्का पाला, जूना सोमवारिया में में विद्यार्थियों के घर-घर बातचीत की।

1 हजार लोगों के हस्ताक्षर करवाए गए। 25 मई को पहली बार स्वीमिंग पूल से कलेक्टोरेट तक रैली निकाली गई और ज्ञापन दिया गया।

21 जुलाई को दूसरी रैली निकाली गई और ज्ञापन दिया गया।

14 अगस्त को तीसरी रैली निकाली और धरना दिया। इस धरने के बाद स्थिति बदली और जनप्रतिनिधि आगे आए और स्कूल की शिफ्टिंग रुक गई।

सेंगर कहते हैं कि शिक्षा हर शख्स का बुनियादी अधिकार है। दु:ख की बात यह हैं कि सरकारें इस बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचतीं। कमजोर आय वर्ग को आरटीई के तहत (शिक्षा के अधिकार) कक्षा 1-8 तक के विद्यार्थियों को निजी स्कूल में शिक्षा दिलाई जाती है लेकिन इससे आगे पढऩे के लिए सरकारी स्कूल ही उनके सबसे बड़ा सहारा होते हैं। अगर यह भी दूर-दूर पहुंच दिए जाएंगे तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे। आरटीई में बच्चों की क्लास के हिसाब से स्कूल की दूरी भी तय रखी गई है। प्राइमरी के बच्चों का स्कूल 1-3 मिडिल वालों को 1-5 और हाईस्कूल-हायरसेकंडरी स्कूल के विद्यार्थियों का 8 किलोमीटर से दूर नहीं होना चाहिए। दाउदखेड़ी में नूतन मिडिल और महाकाल कन्या मैदान मिडिल स्कूल की मर्जिंग इस नियम का उल्लंघन करती है।

दो स्कूलों की शिफ्टिंग भी रुकेगी
सेंगर कहते हैं कि महाराजवाड़ा क्रंमाक -2 और माधवगंज स्कूल की शिफ्टिंग भी रोकी जाएगी।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें