दिल्ली दंगों के 12 आरोपियों को किया बरी

कोर्ट ने कहा- भीड़ में शामिल होना दोष साबित नहीं करता
नईदिल्ली, एजेंसी। दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में 12 आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ सिर्फ इसलिए आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती, क्योंकि वह गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा था। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ निजी अपराध का सबूत जरूरी है। सुनवाई एडीशनल सेशन कोर्ट जज परवीन सिंह कर रहे थे।
मामले में लोकेश सोलंकी, पंकज शर्मा, अंकित चौधरी, प्रिंस, जतिन शर्मा, हिमांशु ठाकुर, विवेक पंचाल, ऋषभ चौधरी, सुमित चौधरी, टिंकू अरोड़ा, संदीप और साहिल आरोपी थे। कोर्ट ने कहा, ‘गैरकानूनी सभा में रहते हुए किसी व्यक्ति का घातक हथियार से लैस होना उसका व्यक्तिगत कृत्य है, जो आईपीसी की धारा 144 के तहत अपराध बनता है।
सिर्फ गैरकानूनी सभा का सदस्य होने से किसी व्यक्ति पर ऐसी जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। अभियोजन को आरोपी के खिलाफ उन खास कृत्यों का सबूत देना था, जिनसे अपराध हुए। केवल भीड़ में शामिल होने के आरोप के आधार पर दोष साबित नहीं किया जा सकता।









