अमेरिका का ईरान पर एक महीने बाद फिर हमला

अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया है। यह कार्रवाई जुलाई के बाद ईरान पर पहली ज्ञात अमेरिकी सैन्य कार्रवाई है।
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने करीब एक महीने बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया। लारक द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को बनाया निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के जवान इन लॉन्चर्स से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगों (Sea Mines) से लैस रॉकेट दागने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिका ने इसी संभावित खतरे को देखते हुए लॉन्चर्स पर हमला किया। अमेरिकी सेना ने इस कार्रवाई को सीमित और सटीक बताया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में नागरिक जहाजों और व्यावसायिक समुद्री यातायात की सुरक्षा करना था।
जुलाई के बाद पहली अमेरिकी स्ट्राइक
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले अमेरिका ने 29 जुलाई को ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े कई ठिकानों पर हमले किए थे। इसके बाद करीब एक महीने तक दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य हमलों में विराम देखने को मिला था। 30 अगस्त की लारक द्वीप पर कार्रवाई के साथ यह सैन्य तनाव फिर बढ़ गया है।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिकी हमले के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कार्रवाई की निंदा करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरानी मीडिया के अनुसार, हमले में कुछ सैनिकों और नागरिकों के मारे जाने तथा घायल होने की बात कही गई है। इसके बाद ईरान की ओर से जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागे जाने की खबर सामने आई। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने आठ मिसाइलों को रोका।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इस जलमार्ग से होकर गुजरता था। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या समुद्री बारूदी सुरंगों का खतरा वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी हमले के बाद तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। इससे आशंका बढ़ी है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।









