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बच्चा स्कूल जाने से मना करता है? प्यार और धैर्य से ऐसे करें मदद

पहली बार स्कूल जाना बच्चों के लिए एक बड़ा बदलाव होता है। अब तक बच्चा घर और परिवार के बीच सुरक्षित माहौल में रहता है, लेकिन स्कूल में उसे नए लोग, नए दोस्त और नई चीजों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शुरुआत में रोना, माता-पिता से दूर न जाना या स्कूल जाने से मना करना सामान्य है। कुछ बच्चों को नए माहौल में घुलने-मिलने में थोड़ा समय लगता है। उन्हें डर रहता है कि माता-पिता से दूर होने के बाद क्या होगा या वे स्कूल में अकेले कैसे रहेंगे।

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हालांकि, अगर बच्चा कई हफ्तों तक रोज स्कूल जाते समय बहुत ज्यादा रोता है, स्कूल में लंबे समय तक परेशान रहता है, किसी एक्टिविटी में हिस्सा नहीं लेता या घर आने के बाद भी स्कूल के नाम से घबराने लगता है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है।

ऐसी स्थिति कई बार सेपरेशन एंग्जाइटी यानी माता-पिता से अलग होने के डर की वजह से हो सकती है। बच्चे को डांटने या जबरदस्ती करने के बजाय उसे प्यार, भरोसे और धैर्य के साथ स्कूल के माहौल में सहज बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

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बच्चे स्कूल जाने से क्यों डरते हैं?

5 साल की उम्र में बच्चे के लिए माता-पिता उसकी सबसे सुरक्षित जगह होते हैं। जब वह पहली बार उनसे दूर जाता है तो उसके मन में कई सवाल आ सकते हैं-

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  • क्या मम्मी-पापा वापस आएंगे?
  • अगर मुझे कुछ परेशानी हुई तो कौन मदद करेगा?
  • यहां सब लोग नए हैं, मैं कैसे रहूंगा?

नए माहौल, शर्मीले स्वभाव या किसी खराब अनुभव के कारण भी बच्चे का डर बढ़ सकता है।

माता-पिता क्या करें?

1. बच्चे की भावना को समझें

बच्चे से यह न कहें कि “रोना बंद करो” या “बड़े बच्चे नहीं रोते।” इससे उसका डर और बढ़ सकता है। इसके बजाय कहें-“मुझे पता है तुम्हें डर लग रहा है, लेकिन तुम सुरक्षित हो। मैं छुट्टी के समय तुम्हें लेने जरूर आऊंगी।”

2. स्कूल छोड़ते समय ज्यादा देर न रुकें

बच्चे को प्यार से गले लगाएं, भरोसा दें और मुस्कुराकर बाय करें। बार-बार वापस जाकर मिलने से बच्चे का डर बढ़ सकता है।

3. रोज एक जैसा रूटीन बनाएं

समय पर उठना, तैयार होना, नाश्ता करना और स्कूल जाना जैसी नियमित दिनचर्या बच्चे को सुरक्षित महसूस कराती है।

4. स्कूल को डर की जगह न बनाएं

बच्चे से कभी न कहें कि “टीचर डांटेंगी” या “नहीं माने तो स्कूल भेज देंगे।” स्कूल को सीखने, खेलने और दोस्त बनाने की जगह के रूप में दिखाएं।

5. टीचर से बात करते रहें

टीचर से पूछें कि बच्चा कब तक रोता है, किस एक्टिविटी में उसकी रुचि दिखती है और वह किन बच्चों के साथ सहज महसूस करता है। घर और स्कूल के मिलकर प्रयास करने से बच्चे को जल्दी मदद मिलती है।

6. छोटी सफलता की तारीफ करें

अगर बच्चा थोड़ा कम रोया, किसी दोस्त से बात की या किसी एक्टिविटी में हिस्सा लिया तो उसकी तारीफ जरूर करें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा।

अगर 4-6 हफ्तों बाद भी बच्चे में सुधार न हो, वह स्कूल जाने से पूरी तरह मना करे, बहुत ज्यादा घबराहट महसूस करे या उसकी नींद और खाने पर असर पड़े तो चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है। स्कूल जाते समय बच्चे का रोना उसकी कमजोरी नहीं है। यह नए बदलाव के प्रति उसकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती है। प्यार, धैर्य और भरोसे के साथ ज्यादातर बच्चे धीरे-धीरे स्कूल के माहौल में घुलने-मिलने लगते हैं।

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