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युवा ब्राह्मण समाज दहन नहीं करने पर अड़ा और समितियां परंपरा पर थमी…

रावण पर रार : पुतला दहन के खिलाफ ब्राह्मण समाज के युवाओं ने खोला मोर्चा, नोटिस देने की तैयारी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रावण दहन शास्त्रोक्त है या नहीं, इसे लेकर शहर में बहस शुरू हो गई है, क्योंकि युवा ब्राह्मण समाज का मानना है कि रावण का वध हुआ था दहन नहीं। ऐसे में रावण का पुतला दहन करना अनुचित है। इसे लेकर युवा ब्राह्मण समाज ने मोर्चा खोल दिया है। उसने प्रमुख दशहरा उत्सव समितियों के आयोजकों को नोटिस देने की तैयारी की है। इधर, आयोजन समितियां परंपरा की दुहाई देते हुए अपनी तैयारी में जुटी हुई हैं।

इनमें से कुछ ने तो रावण पुतले का निर्माण भी शुरू कर दिया है। दरअसल, युवा ब्राह्मण समाज रावण को अपना पूर्वज मानता है। उसका मानना है कि रावण ने ऐसा कोई अनैतिक काम नहीं किया कि उसका पुतला जलाया जाए। शास्त्रों में कहीं भी रावण दहन का उल्लेख नहीं है। कालांतर में लोगों ने अपने मुताबिक व्यवस्था बना ली और पुतला दहन करने लगे। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी का कहना है कि रावण दहन कई कारणों से शास्त्रोक्त नहीं है।

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रावण दहन क्यों उचित नहीं

1- रावण का रामजी ने वध किया था, दहन नहीं। इसका उल्लेख रामचरित मानस से लेकर अलग-अलग रामायण में मिलता है।

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2- रावण का वध चैत्र महीने के दशहरे पर हुआ था ना कि अश्विन महीने की दशमी तिथि पर।

3- महेश पुजारी के मुताबिक दशमी तिथि शमी पूजन की तिथि है। यानी इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई का ऐलान किया था और शमी पूजन किया था।

4- ग्रंथों के मुताबिक यह युद्ध 85 दिन चला था। इसमें 17 दिन शोक के थे। यानी पूरा युद्ध 102 दिन चला था।

5- 7 दिन तक रावण और रामजी लड़े थे। फिर रावण का वध हुआ था।

युवा ब्राह्मण समाज के मुताबिक रावण का वध हुआ था, वध करें, दहन नहीं

दहन की बजाय वध करें
पुजारी के अनुसार अगर लंका विजय का उत्सव मनाना है तो चैत्र दशहरे पर मनाना चाहिए। इसी तरह रावण का दहन करने के बजाय वध करना चाहिए। पुजारी ने कहा कि शहर में दशहरा आयोजन करने वाली चार प्रमुख समितियों को उनकी संस्था नोटिस देने जा रही है। उन्हें रावण दहन नहीं करने का कहा जाएगा। अगर फिर भी नहीं मानते हैं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

समितियां परंपरा पर अड़ीं, कई ने तैयारी शुरू की
शहर में यूं तो पूरे एक सप्ताह तक जगह-जगह रावण दहन होता है, लेकिन परंपरागत रूप से चार बड़े आयेाजन दशहरा और उसके दूसरे दिन होते हैं। स्व. ओम अमरनाथ खत्री दशहरा आयोजन समिति दशहरा मैदान, स्व. प्रेमनारायण स्मृति दशहरा आयोजन समिति कार्तिक मेला ग्राउंड, सिद्धवट युवा मंच सिद्धवट और जयङ्क्षसह दरबार दशहरा आयोजन समिति शास्त्रीनगर में दशहरा उत्सव करती है। इन लोगों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। इनका कहना है कि वे लोगों और परंपरा के अनुसार पुतला जलाएंगे।

किसने क्या कहा

समिति का नाम बदला है, काम नहीं, रावण बनना शुरू

इस बार समिति के नाम में बदलाव हुआ है। ओमजी की याद में इसे लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा आयोजन समिति किया गया है। ५७ वें साल में इस बार भी अच्छे से रावण दहन किया जाएगा। पुतले का निर्माण शुरू हो गया है। आतिशबाजी भी होगी। ओम जी की स्मृति में कुछ नया करने की कोशिश कर रहे हैं। एक दो दिन में यह फाइनल हो जाएगा।
मनीष शर्मा, संयोजक लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति

पुरखों ने डाली थी परंपरा, कैसे छोड़ देेंगे

शास्त्रीनगर मैदान में हर साल की तरह इस बार भी बासी दशहरे (21 अक्टूबर) को रावण दहन होगा। पुरखों ने रावण दहन की परंपरा डाली थी, उसे ऐसे कैसे छोड़ देंगे, अगर किसी को आपत्ति हैं तो हमारे पुरखों के पास जाकर आपत्ति पर स्वीकृति लेकर आए।
विजय सिंह दरबार, शास्त्रीनगर दशहरा उत्सव समिति

पुतला बनेगा और जलेगा भी

सिद्धवट पर हर साल की तरह ही बासी दशहरे (२१ अक्टूबर) को रावण दहन होगा। पुतला बनेगा भी और जलेगा भी। लोगों का क्या है, वह कहते रहते हैं। परंपरा थोड़ी छोड़ सकते हैं। लोग पुतला दहन को उत्सव की तरह मनाते हैं, तो हम भी आयोजन करते हैं।
राघवेंद्र चतुर्वेदी
सिद्धवट युवा मंच सिद्धवट

इस संबंध में स्व. प्रेमनारायण यादव स्मृति दशहरा उत्सव समिति के संयोजक चेतन यादव से कई प्रयास के बाद भी चर्चा नहीं हो पाई। बहरहाल, रावण दहन के मुद्दे ने शहर में एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना है कि मामला तूल पकड़ता है या टांय-टांय फिस्स हो जाता है।

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