त्यौहार के समय में तेज आवाज से रहे सावधान: हार्ट-ब्रेन पर असर, हियरिंग लॉस का खतरा

नवरात्रि और दशहरे के दौरान जगह-जगह मेले, गरबा और धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। पंडालों में माता के भजन गूंज रहे हैं और लाउडस्पीकर की आवाज से उत्सव का माहौल और भी खास बन रहा है। लेकिन इस शोर-शराबे के बीच अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। लाउडस्पीकर की आवाज अगर जरूरत से ज्यादा तेज हो या लंबे समय तक उसके आसपास रहना पड़े, तो इसका असर सेहत पर पड़ सकता है। इससे कानों में परेशानी होने के साथ सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। वहीं, लगातार तेज शोर में रहने से तनाव, नींद की कमी और ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
साल 2025 में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस में शोर के संपर्क और हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग व स्ट्रोक के जोखिम के बीच संबंध की चर्चा की गई थी। ऐसे में त्योहारों के दौरान तेज आवाज से बचाव करना जरूरी है।
तेज आवाज दिमाग और शरीर पर कैसे डालती है असर?
जब हम लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहते हैं, तो शरीर पर इसका असर केवल कानों तक सीमित नहीं रहता। तेज शोर शरीर में तनाव की प्रतिक्रिया को सक्रिय कर सकता है। इससे एड्रेनलिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन के स्तर में बदलाव हो सकता है। इसका असर नींद और मानसिक सुकून पर पड़ सकता है। लगातार शोर में रहने वाले लोगों को सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, थकान और किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। आवाज की तीव्रता और उसके संपर्क में बिताया गया समय भी काफी मायने रखता है। सामान्य बातचीत की आवाज करीब 60 डेसिबल होती है, जबकि तेज लाउडस्पीकर की आवाज 85 से 110 डेसिबल या इससे अधिक तक पहुंच सकती है। इतनी तेज आवाज के संपर्क में लंबे समय तक रहने से सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है।

दिल की सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है तेज शोर
लगातार तेज आवाज में रहने से शरीर तनाव महसूस कर सकता है। इससे कुछ समय के लिए दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर में बदलाव हो सकता है। लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने का संबंध हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से भी पाया गया है। तेज शोर रक्त वाहिकाओं की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से हाई ब्लड प्रेशर या दिल से जुड़ी समस्या है, तो उसे शोर से बचने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मेले में कुछ देर तेज आवाज सुनने से सीधे हार्ट अटैक हो जाएगा। जोखिम कई बातों पर निर्भर करता है, जिनमें शोर की तीव्रता, संपर्क की अवधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति शामिल हैं।
कानों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है लाउडस्पीकर की तेज आवाज
कान के अंदर बेहद संवेदनशील कोशिकाएं होती हैं, जो आवाज को समझने में मदद करती हैं। बहुत तेज आवाज इन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। शुरुआत में कान बंद होने जैसा महसूस हो सकता है या कुछ समय के लिए सुनाई कम दे सकता है। कई बार तेज आवाज के संपर्क में आने के बाद कानों में सीटी बजने, घंटी या भनभनाहट जैसी आवाज सुनाई देती है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार या लंबे समय तक तेज शोर में रहने से सुनने की क्षमता स्थायी रूप से भी कम हो सकती है। कान के अंदर मौजूद कुछ संवेदनशील कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने के बाद वे सामान्य रूप से दोबारा विकसित नहीं होतीं। इसलिए तेज आवाज से बचाव करना ही सबसे बेहतर तरीका है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
बच्चों, बुजुर्गों, पहले से सुनने की समस्या वाले लोगों और हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को तेज शोर से बचने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को पहले से कानों में परेशानी है, तो तेज आवाज वाली जगहों पर जाने से बचना बेहतर हो सकता है। वहीं, दिल की बीमारी या ब्लड प्रेशर की समस्या वाले लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
भारत में लाउडस्पीकर को लेकर क्या हैं नियम?
भारत में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 लागू हैं। इन नियमों के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए दिन और रात में ध्वनि की सीमा निर्धारित की गई है। लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए भी संबंधित अनुमति और समय से जुड़े नियम लागू होते हैं। धार्मिक आयोजनों, मेलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में आयोजकों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। अगर कहीं निर्धारित सीमा से ज्यादा शोर हो रहा है, तो स्थानीय प्रशासन या संबंधित प्राधिकरण से शिकायत की जा सकती है।
त्योहार का आनंद लें, सेहत का भी रखें ध्यान
नवरात्रि और दशहरे के मेले खुशियां मनाने और परिवार के साथ समय बिताने का मौका देते हैं। ऐसे में थोड़ी सावधानी बरतकर तेज आवाज से होने वाले नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है। लाउडस्पीकर से उचित दूरी रखें, शोर वाली जगह पर कम समय बिताएं और कानों में होने वाली परेशानी को नजरअंदाज न करें। याद रखें, त्योहार का असली आनंद तभी है, जब आप अपनी सेहत का भी पूरा ध्यान रखें।









