नवरात्र: मां की भक्ति का रंग चढ़ा, सुरों की पूजा के बीच नृत्य से आराधना

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नवरात्र में शक्ति की भक्ति का रंग पूरे शहर पर चढ़ा हुआ है। हाल यह है कि सुर पूजा बन गए है और गरबा नृत्य आराधना। श्रद्धा पंडालों में कदमों में उतर कर थिरक रही है। रोशनी से दमकते मैदान, रंग-बिरंगी पोशाक, ढोल और डीजे की धुन ने मां जगदंबा की उपासना का नशा चढ़ा दिया है।
शाम से शुरू होने वाले गरबा गीतों में कहीं मां दुर्गा के शौर्य का स्मरण है तो कहीं ममता का भाव। चरम की तरफ पहुंच रहे गरबों के कारण शहर का माहौल एकदम बदला हुआ है। कभी रात 11 बजे तक चादर तानकर सोने वाला शहर अब तड़के तक जाग रहा है। बाजार भी इस वजह से गुलजार हैं। अक्षरविश्व के फोटो जर्नलिस्ट राहुल यादव और विजय मालवीय इन्हीं नव रातों में शहर का चक्कर लगा रहे हैं और आपके लिए बेहतरीन गरबे ला रहे हैं।
तपस्विनी ग्रुप के गरबों में रात तक बंध रहा समां
हीरा मिल की चाल का तपस्विनी ग्रुप जीरो पाइंट ओवरब्रिज के नीचे स्थित ह्दयेश्वर महादवे मंदिर में गरबे करा रहा है। ग्रुप का यह 14 वां आयोजन है और यह सिर्फ महिलाओं और युवतियों के लिए है। डीजे की धुन पर पारंपरिक गीतों पर ही यहां गरबे खेले जा रहे हैं।ग्रुप के धर्मेश नागर बताते हैं कि आयोजन के लिए 64 बाय 64 को फ्लोर तैयार किया गया है।
परिसर को चारों तरफ से बाउंड्रीवॉल से कवर किया गया है। सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। यहां पारंपरिक गीतों पर गरबे हो रहे हैं। करीब 1 हजार लोग रोजाना शिरकत करते हैं और मां की आराधना करते हैं। ग्रुप के जितेंद्र मालवीय, अंकुश माहेश्वरी, अर्जुन बुंदेला, संदीप कछवाय, मनीष शर्मा, संदीप चौहान, अरविंद कारपेंटर, रवींद्र मालवीय, कपिल सोलंकी, कीर्ति सांवरिया, राहुल शर्मा और अन्य सदस्यों का पूरा परिवार यहां जुटा रहता है।
गुजराती समाज परिसर में परंपरागत गरबे में उमड़ रही भीड़
शहर के सबसे पुराने गरबों में गुजराती समाज का गरबा भी शामिल है। नईसड़क स्थित समाज की धर्मशाला परिसर में देर रात तक गरबे खेले जा रहे हैं। इन गरबों की खास बात मिठास भरे गुजराती गीत हैं। उसमें भी विशिष्ट यह है कि गरबा गीत गाने वाले शख्स समाज से ही हैं। 45 वें आयोजन में गीत-संगीत के बीच होने वाले गरबों की खासियत इसका पूरी तरह गुजराती रंग में रंगा होना है। यहां नंगे पैर ही गरबा किए जाते हैं। शुरुआत और समापन पर आरती की जाती है।
रोजाना समाज के करीब 500 लोग शिरकत करते हैं। अन्य समाज की महिलाएं भी आकर गरबा कर सकती हैं लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से पुरुषों को अनुमति नहीं होती है। समाज के सचिव संजय आचार्य बताते हैं कि गरबे में शामिल होने और देखने वालों के लिए रोजाना अलग-अलग तरह के नाश्ते का प्रबंध किया जाता है। बड़ी संख्या में लोग आते हैं।









