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कैल्शियम स्कोर से जानें हार्ट अटैक का खतरा, कितना स्कोर है चिंताजनक?

कैल्शियम स्कोर टेस्ट हार्ट की सेहत और हार्ट अटैक के खतरे का आकलन करने में मददगार हो सकता है। यह एक विशेष प्रकार का सीटी स्कैन है, जिससे दिल की धमनियों में जमा कैल्शियम का पता लगाया जाता है। कई बार हृदय रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते और बीमारी का पता तब चलता है, जब स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे में यह टेस्ट कोरोनरी आर्टरी डिजीज के जोखिम को समझने और समय रहते जरूरी सावधानियां बरतने में मदद कर सकता है।

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क्या है कैल्शियम स्कोर टेस्ट?

कैल्शियम स्कोर टेस्ट को कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (CAC) टेस्ट भी कहा जाता है। इसमें हार्ट तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में जमा कैल्शियम की मात्रा मापी जाती है। जब धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने से प्लाक बनता है, तो समय के साथ इसका कुछ हिस्सा सख्त हो सकता है। इससे कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा बढ़ सकता है। इस टेस्ट से मिलने वाला स्कोर डॉक्टर को हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने और आगे की जांच या इलाज का फैसला लेने में मदद करता है। हालांकि, यह जांच सभी प्रकार के प्लाक या हार्ट की हर समस्या का पता नहीं लगा सकती।

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किन लोगों को कराना चाहिए यह टेस्ट?

यह जांच खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनमें हार्ट डिजीज का मध्यम जोखिम है और यह तय करना जरूरी है कि उन्हें बचाव के लिए दवाओं की जरूरत है या नहीं। अधिक उम्र, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और परिवार में कम उम्र में हृदय रोग होने का इतिहास जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति को यह टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। इसकी सलाह उम्र, स्वास्थ्य और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर देते हैं।

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कैसे होता है कैल्शियम स्कोर टेस्ट?

कैल्शियम स्कोर टेस्ट एक नॉन-इनवेसिव जांच है, जिसमें शरीर पर चीरा लगाने या आमतौर पर कंट्रास्ट डाई देने की जरूरत नहीं पड़ती। मरीज को सीटी स्कैन मशीन की टेबल पर लिटाया जाता है और सीने पर ईसीजी पैच लगाए जाते हैं। इसके बाद मशीन दिल की तस्वीरें लेती है। जांच के दौरान कुछ सेकंड के लिए सांस रोकने को कहा जा सकता है। पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 10 से 15 मिनट लगते हैं।

कैल्शियम

सिर्फ स्कोर के आधार पर बीमारी या ब्लॉकेज की गंभीरता तय नहीं की जाती। डॉक्टर अन्य जांच और जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखते हैं।

क्या कैल्शियम स्कोर टेस्ट के साइड इफेक्ट हैं?

यह जांच आमतौर पर सुरक्षित होती है, लेकिन इसमें कम मात्रा में रेडिएशन का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसे बिना जरूरत बार-बार नहीं कराना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान भी रेडिएशन के कारण इस जांच से बचने या विशेष चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत होती है। भारत में कैल्शियम स्कोर टेस्ट की कीमत आमतौर पर लगभग 2,000 से 6,000 रुपये हो सकती है। वास्तविक खर्च अस्पताल, शहर और जांच केंद्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

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हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

दिल की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लें, फल और हरी सब्जियां खाएं, नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें। धूम्रपान से बचें तथा ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। कैल्शियम स्कोर टेस्ट हार्ट अटैक की भविष्यवाणी करने वाला निश्चित टेस्ट नहीं है, बल्कि जोखिम का आकलन करने का एक तरीका है। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या अचानक पसीना आने जैसे लक्षण हों, तो स्कोर की परवाह किए बिना तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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