लोन के साथ बीमा लेने का दबाव होगा खत्म? IRDAI के प्रस्ताव से बदलेंगे नियम

बैंक से लोन लेने जाते समय कई ग्राहकों को बीमा पॉलिसी लेने के लिए भी कहा जाता है। अब बीमा वितरण से जुड़े नियमों में बदलाव हुआ, तो बैंकों की इस कारोबार से होने वाली कमाई पर असर पड़ सकता है। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों और वितरण माध्यमों को दिए जाने वाले कमीशन से संबंधित बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इससे उन बैंकों की आय प्रभावित हो सकती है, जो बीमा पॉलिसियां बेचकर अच्छी-खासी कमाई करते हैं।
हालांकि, प्रस्तावित कमीशन कटौती का मतलब यह नहीं है कि बैंक हर स्थिति में लोन के साथ बीमा बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएंगे। लोन और बीमा की शर्तें अलग-अलग होती हैं। ग्राहकों को किसी बीमा उत्पाद की जरूरत, उसकी लागत और नियम समझकर ही फैसला लेना चाहिए।
IRDAI के प्रस्ताव में क्या बदल सकता है?
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी IRDAI ने बीमा वितरण व्यवस्था को लेकर एक परामर्श पत्र जारी किया है। इसमें अलग-अलग बीमा उत्पादों और उन्हें बेचने वाले माध्यमों के आधार पर कमीशन की सीमा तय करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके साथ बीमा कंपनियों के प्रबंधन और वितरण खर्च से जुड़े नियमों में बदलाव पर भी विचार किया गया है। अगर प्रस्ताव लागू होता है, तो बीमा बेचने के बदले बैंकों को मिलने वाली रकम घट सकती है। इसका असर जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा और सामान्य बीमा उत्पादों के वितरण से होने वाली आय पर पड़ने की आशंका है। फिलहाल प्रस्ताव पर आधारित अनुमानों को अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियामक कौन-से नियम लागू करता है और वे कब से प्रभावी होते हैं।
बंधन बैंक की कमाई पर 200 करोड़ रुपये तक असर का अनुमान
बीमा वितरण से होने वाली आय में संभावित कमी को देखते हुए बैंक दूसरे कारोबारों से कमाई बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। बंधन बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ पार्थ प्रतिम सेनगुप्ता के मुताबिक, प्रस्ताव लागू होने पर बैंक की सालाना थर्ड पार्टी प्रोडक्ट से होने वाली आय में करीब 200 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। इस संभावित नुकसान की भरपाई के लिए बैंक म्यूचुअल फंड वितरण, होलसेल बैंकिंग, ट्रेड फाइनेंस और विदेशी मुद्रा सेवाओं पर ध्यान दे रहा है। इसके अलावा छोटे शहरों में बीमा वितरण का दायरा बढ़ाने की योजना भी है। इससे साफ है कि बैंक अपनी कमाई के लिए केवल बीमा पॉलिसियों पर निर्भर रहने के बजाय दूसरे वित्तीय उत्पादों और सेवाओं में भी अवसर तलाश रहे हैं।
AU और IDFC FIRST बैंक की क्या है तैयारी?
कमीशन से जुड़े संभावित बदलावों के बीच AU स्मॉल फाइनेंस बैंक और IDFC FIRST बैंक भी अपनी कारोबारी रणनीति पर काम कर रहे हैं। AU स्मॉल फाइनेंस बैंक विदेशी मुद्रा कारोबार, क्रेडिट कार्ड और ट्रेड फाइनेंस जैसी सेवाओं से आय बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। वहीं, IDFC FIRST बैंक विदेशी मुद्रा जमा से जुड़ी फंडिंग लागत में बचत, प्रोडक्ट एजेंसी कारोबार के विस्तार और अन्य वित्तीय गतिविधियों के जरिए संभावित असर को कम करने की कोशिश कर रहा है। बैंकों के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है, क्योंकि बीमा वितरण से होने वाला कमीशन उनकी गैर-ब्याज आय का एक हिस्सा होता है। इस आय में कमी आने पर दूसरे कारोबारों से राजस्व बढ़ाना जरूरी हो सकता है।
एक्सिस बैंक को बिक्री बढ़ने से राहत की उम्मीद
एक्सिस बैंक संभावित कमीशन कटौती के प्रभाव को कम करने के लिए बीमा पॉलिसियों की बिक्री बढ़ाने और उत्पादों के मिश्रण में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। बैंक की रणनीति के पीछे यह संभावना है कि बीमा उत्पादों की कीमत कम होने से ज्यादा ग्राहक पॉलिसी खरीदने के लिए आगे आ सकते हैं। यदि बिक्री की संख्या बढ़ती है, तो प्रति पॉलिसी मिलने वाले कम कमीशन की कुछ भरपाई हो सकती है। हालांकि, यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह ग्राहकों की मांग, बीमा उत्पादों की कीमत और अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा।
HDFC बैंक भी प्रस्ताव के असर का कर रहा आकलन
HDFC बैंक भी कमीशन में प्रस्तावित कटौती से होने वाले संभावित वित्तीय असर का मूल्यांकन कर रहा है। बैंक के सामने चुनौती यह है कि बीमा वितरण से मिलने वाली आय घटने पर उसकी भरपाई किस तरह की जाए। दूसरी ओर, बीमा की लागत कम होने से ग्राहकों की संख्या बढ़ने और पॉलिसियों को लंबे समय तक जारी रखने की संभावना भी महत्वपूर्ण है। यदि ग्राहक कम कीमत पर बीमा खरीदते हैं, तो इससे बीमा कारोबार की पहुंच बढ़ सकती है। हालांकि, इसका फायदा कितना मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही बैंकों की आय और बीमा कारोबार पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
सरकारी बैंकों को भी हो सकता है नुकसान
कमीशन में संभावित कटौती का असर सरकारी बैंकों पर भी पड़ सकता है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार, प्रस्ताव लागू होने पर बीमा वितरण से मिलने वाली उसकी फीस में करीब 33 प्रतिशत की कमी आ सकती है। वहीं, केनरा बैंक ने जीवन बीमा वितरण से होने वाली आय पर सालाना 120 करोड़ से 145 करोड़ रुपये तक के संभावित असर का अनुमान जताया है। बैंक के मुताबिक, सभी वितरण कारोबारों को मिलाकर कुल प्रभाव 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं रहने की उम्मीद है। ये अनुमान बताते हैं कि बीमा वितरण से होने वाली आय में बदलाव बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कारोबारी मुद्दा बन सकता है।
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ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है?
IRDAI के प्रस्ताव का उद्देश्य और अंतिम स्वरूप नियमों के जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। यदि कमीशन और वितरण लागत में कमी का लाभ ग्राहकों तक पहुंचता है, तो कुछ बीमा उत्पादों की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। लेकिन यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर बीमा पॉलिसी सस्ती हो जाएगी।

IRDAI के प्रस्तावित बदलाव बैंकों की बीमा वितरण से होने वाली कमाई को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से बैंक म्यूचुअल फंड, विदेशी मुद्रा और ट्रेड फाइनेंस जैसे कारोबारों पर ध्यान बढ़ा रहे हैं। हालांकि, ग्राहकों के लिए बीमा की कीमतों और नियमों में क्या बदलाव होगा, यह अंतिम नियामकीय फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।









