दो साल बाद भी एक पत्र का जवाब नहीं दे सके…

30 करोड़ रुपए का पुराना लोन गूंजा, जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के लिए उठे स्वर
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नगर निगम के विशेष सम्मेलन में शुक्रवार को 30 करोड़ के पुराने कर्ज का मुद्दा जमकर गूंजा। इसके साथ सुदामा मार्केट का मुद्दा भी उभरा। सवाल उठा कि दो साल से मार्केट बनकर तैयार है लेकिन इसको लेकर अफसर अब तक एक पत्र का जवाब नहीं दे सके। इससे निगम को 20 करोड़ रुपए की आय नहीं हो पा रही। सड़क चौड़ीकरण में मुआवजे के 16 प्रकरण एक साथ मंजूर कर 82 मकानों के मामले में 14 करोड़ 82 लाख 3920 रुपए का मुआवजा राशि मंजूर कर सम्मेलन स्थगित कर दिया।
पीएम आवास योजना के लिए निगम ने शुक्रवार को 15 करोड़ रुपए का लोन लेने का प्रस्ताव रखा, जिसका विरोध किया गया। निगम अध्यक्ष कलावती यादव ने संशोधित प्रस्ताव 3 नवंबर को रखने का निर्णय किया। पार्षद नीलम कालरा ने सवाल उठाया कि पहले 30 करोड़ का लोन मंजूर हो गया था तो अब दोबारा क्यों? पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने कहा अगर रेरा की अड़चन आई थी तो पहले अधिकारी क्या करते रहे? जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। 25 अक्टूबर 2024 में लोन के लिए निगम परिषद ने मंजूरी दी थी और जून 2025 में सभी स्वीकृतियां मिल गई थीं।
अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने बताया रेरा का पंजीयन न होने से बैंक ने लोन देने में असहमति दी थी। एमआईसी सदस्य सत्यनारायण चौहान ने कहा सुदामा मार्केट दो साल पहले बन गया लेकिन अब यह जर्जर हो रहा। सदन में इसकी दुकानें फ्री होल्ड पर बेचने को लेकर चर्चा हुई थी। तब लीज पर देने का भी सुझाव दिया गया था। इस पर सदन में अधिकारियों को एक माह में पत्र देकर स्थिति साफ करने को कहा था।
गुस्से में पार्षद सदन छोड़ घर चली गईं
पार्षद सपना सांखला ने साधारण सम्मेलन को लेकर बात कहनी चाही लेकिन निगम सभापति ने कहा विषय से हटाकर सदन का नियम मत तोडि़ए। इस पर भी वे अपनी बात कहने लगीं। तब निगम अध्यक्ष ने कहा मुझे मजबूर न कीजिए अन्यथा सदन से बाहर करना पड़ेगा। इस पर सांखला गुस्से में सदन को बीच में छोड़ चली गईं।
महापौर से हुई चूक, एमआईसी सदस्य भी नहीं कर सके समर्थन
15 करोड़ का लोन अब 3 नवंबर तक टलने के पीछे महापौर परिषद की बड़ी तकनीकी चूक बताई जा रही।
3 जुलाई 2026 को एमआईसी हुई थी, जिसमें ठहराव क्रमांक 84 के तहत 15 करोड़ रुपए का लोन लेने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
यह लोन प्रधानमंत्री आवास योजना (सबके लिए आवास 2022) के तहत एएचपी घटक के तहत शेष योजना को पूर्ण करने के लिए है।
एमआईसी ने पूर्व के 30 करोड़ के लोन का ध्यान नहीं रखा। जिससे संशोधित प्रस्ताव के लिए प्रस्ताव रोकना पड़ा।









