पलंगपेटी में छिपाया पत्नी का शव, बेटी की गवाही से पिता को मिली सजा

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। करीब तीन साल पहले पत्नी को मारकर उसका शव जलाकर पलंगपेटी में बंद करने वाले पति को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा दी है। इस मामले में नरवर पुलिस ने गहरी विवेचना की भी। तत्कालीन थाना प्रभारी बल्लू सिंह मंडलोई (अब डीएसपी) ने आरोपी के पुत्र और पुत्री से बात की। पुत्री घटना की चश्मदीद थी और उसने कोर्ट में अक्षरक्ष: घटना बयां की। यहीं सजा का आधार बनी।
दरअसल, नरवर थाने के पालखंदा में २०२३ में यह हत्या हुई थी। पेशे से किसान विजय परमार ने चरित्र शंका में पत्नी दीपाबाई की हत्या कर दी थी। बल्लूसिंह मंडलोई ने बताया कि घटना वाले दिन दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ था। परमार को पत्नी के चरित्र पर शंका थी और इसे लेकर दोनों के बीच विवाद होता था। घटना वाले दिन यह इतना बढ़ा कि विजय ने आपा खो दिया और पत्नी पर बेतहाशा प्रहार किए। इससे दीपाबाई ने दम तोड़ दिया। घटना के समय विजय की बेटी घर पर ही थी और उसने बीच-बचाव की कोशिश भी की। पर उसे कामयाबी नहीं मिली।
मौत से डरा, शव जलाया और छिपाया: पत्नी की मौत से विजय घबरा गया। उसने पहले शव को जलाने की कोशिश की और जब इसमें कामयाबी नहीं मिली तो उसे पलंगपेटी में छिपा दिया। वारदात के दो दिन बाद जब शव से बदबू फैली तो लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पलंगपेटी से शव बरामद कर पीएम कराया गया। फिर विवेचना शुरू हुई और पूरा मामला सामने आया। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार बंसल की कोर्ट में मामला पहुंचा और यहां बेटी ने पिता के खिलाफ गवाही दी। मंडलोई ने बताया कि आरोपी को आजीवन कारावास की सजा होना प्रभावी पुलिसिंग का प्रभाव है।









