चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

एससी ने कहा- बढ़ती आबादी का डर अब कमजोर पड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के फैसले पर फिर विचार करने को कहा
नई दिल्ली, एजेंसी। 2 से अधिक बच्चे होने पर पंचायत चुनाव लडऩे से रोकने वाले कानूनों की प्रासंगिकता अब खत्म हो चुकी है। देश में तेजी से घटती प्रजनन दर के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह कमेंट किया और 2003 के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मामला बड़ी बेंच में भेज दिया। कोर्ट ने कहा कि इन कानूनों का आधार रही बढ़ती आबादी की चिंता अब कमजोर पड़ चुकी है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा, हमारा मजबूत मत है कि दो से अधिक बच्चे होने पर दंडित करने वाले कानून अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं। यदि इन बदलावों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भारत को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। बच्चों की संख्या का किसी व्यक्ति की सार्वजनिक पद संभालने की क्षमता से सीधा संबंध नहीं है। यह प्रजनन संबंधी स्वायत्तता के अधिकार का भी उल्लंघन है।
धरना-प्रदर्शन का मौसम है, आप भी करें
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एससी-एसटी के लिए आरक्षित चुनावी सीटो को बदलने की मांग वाली याचिका सुनने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हल्के अंदाज में कहा, गलत नंबर डायल कर रहे है। यह धरना-प्रदर्शन का मौसम है, आप भी ऐसा करिए। आरक्षित सीटो में बदलाव का फैसला संसद का अधिकार क्षेत्र है।









