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भक्तिमय माहौल में श्रावकों ने किया मंत्रोच्चर, गुरुवंतों ने दिया उनको आशीर्वाद

शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लक्ष्मीनगर मेंं तीन दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ

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उज्जैन। रविवार को लक्ष्मीनगर स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर का माहौल धर्ममय था। श्रावक मंत्रोच्चार कर रहे थे तो गुरुवंत उन पर आशीर्वाद की बौछार । मौका था मंदिर में शुरू हुए तीन दिवसीय पडग़ाहन उत्सव का। त्रिदिवसीय महामहोत्सव का शुभारंभ रविवार सुबह पडग़ाहन से हुआ।

गाय-शेर चौराहे पर करीब 250 श्रावको ने मुनियों का स्वागत मंत्रोपचार से किया। 250 श्रावकों में शामिल पुरुष सफेद धोती-गमछा व महिलाओ ने सफेद साड़ी पहनकर मानव शृंखला बनाई। सुबह 9 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में श्रावकों के साथ समाजजन भी उत्साह से भरे दिखाई दिए। उन्होंने भी मुनियों के सत्कार में मंत्रों का जाप किया।

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जानिए क्या है पडग़ाहन
पडग़ाहन जैन धर्म में आहार के लिए निकले मुनि या संत का आदर-सत्कार करने की विधि है। उन्हें श्रावक अपने घर पर आहार के लिए आमंत्रित करते हैं। श्रावक जब किसी जैन संत को अपने घर या द्वार की और आते देखते है तो तब बड़े हर्ष और श्रद्धा के साथ ‘नमोऽस्तु, नमोऽस्तु, नमोऽस्तु’ कहते हैं।

इसके बाद ‘अत्र अत्र अत्र, तिष्ठ तिष्ठ तिष्ठ’ (यहां आइए, यहां ठहरिए) बोलकर महाराज के रुकने की प्रार्थना की जाती है। संत के रुकने पर उनकी तीन परिक्रमा (प्रदक्षिणा) की जाती है और पुन: नमोऽस्तु कहकर घर में प्रवेश करने का अनुरोध किया जाता है। महाराज के घर में प्रवेश करने के बाद उनके चरण धोए जाते हैं और फिर उन्हें भोजनशाला (किचन) में आने का निवेदन किया जाता है।

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उत्सव में कब क्या

 5 अक्टूबर- दोपहर 3.00 से शाम 4.30 श्रुत स्कंध यंत्र प्रतिष्ठा

 6 अक्टूबर- सुबह 7.30 से श्रुत स्कंध यंत्र महामस्तकाभिषेक, सरस्वती पूजन, श्रुत स्कंध स्थापना विधि, श्रुत, स्कंध विधान।

दोपहर 3 से शाम 4.30 – मुनि प्रणीत सागर का तेरहवां दीक्षा दिवस। मोमेंटो वितरण।

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