मक्खी की जांच करने पहुंचे, बिना लाइसेंस मिला ढाबा

उज्जैन-देवास रोड पर पालखंदा के सिद्धि विनायक रेस्टोरेंट पर कार्रवाई
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। न एनएचएआई की परमिशन, ना फूड विभाग की। ना ही स्थानीय पंचायत की। उज्जैन देवास रोड के पालखंदा में बगैर जरूरी अनुमति के ही रेस्टोरेंट एवं ढाबा चलाया जा रहा था। सीएम हेल्पलाइन पर ढाबे पर मक्खी होने की शिकायत की जांच करने पहुंचे फूड विभाग के अफसरों ने जब तफ्तीश शुरू की तो पता चला कि ढाबा बगैर अनुमति ही चल रहा है। तत्काल उन्होंने ढाबा बंद करवाया।
दरअसल, रेस्टोरेंट, ढाबा या खाद्यान्न सामग्री बेचने के लिए फूड विभाग में पंजीयन जरूरी है। पालखंदा के सिद्धिविनायक रेस्टोरेंट एंड ढाबा के संचालक श्याम ने बगैर रजिस्ट्रेशन के ही ढाबा और रेस्टोरेंट शुरू कर दिया था। उनका काम ठीक-ठाक चल रहा था, बस मसला सीएम हेल्पलाइन की एक शिकायत ने बिगाड़ दिया।
यहां रुके एक ग्राहक ने ढाबे पर मक्खी होने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर कर दी। फिर क्या था फूड विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। उसे मक्खी तो मिली ही, ढाबा भी गैरकानूनी तौर पर चलता मिला। फूड ऑफिसर बसंतदत्त शर्मा ने पनीर-बटर के सैंपल लिए और ढाबा बंद करवा दिया। संचालक को लाइसेंस लेने के लिए ताकीद किया है। अब वह ढाबा तभी खोल पाएंगे, जब लाइसेंस होगा।
यह भी किया टीम ने
ढाबा संचालक के कागजों की जांच की। उनके पास किसी भी तरह की अनुमति नहीं मिली।
बटर और पनीर के नमूने लिए गए। बटर खुले बर्तन में रखा था। हाईवे के ढाबों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी बटर और पनीर में ही होती है। ऐसे में इनके सैंपल लिए गए।
यह नमूने आगे की जांच के लिए स्टेट लैबोरेटरी भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई होगी।
रजिस्ट्रेशन नहीं होने तक ढाबा बंद रहेगा।
अक्षरविश्व नॉलेज : महज 100 रुपए के शुल्क पर जारी होता है लाइसेंस
फूड लाइसेंस लेने की प्रक्रिया सरकार ने बेहद आसान कर रखी है। महज 100 रुपए का शुल्क चुकाकर यह लाइसेंस लिया जा सकता है। इसके लिए फूड विभाग के पोर्टल के लाइसेंस सेक्शन पर आवेदन करना होता है। आवेदन में शुल्क के साथ जगह का जिक्र करना होता है। चूंकि यह आम आदमी से जुड़ा मसला है, ऐसे में महज एक दिन में ही लाइसेंस जारी हो जाता है। हर साल इसका रिन्यूअल कराना होता है।
यह लाइसेंस टर्नओवर के मुताबिक जारी होता है। 1 रुपए से लेकर 1.5 करोड़ तक के टर्नओवर पर लाइसेंस फीस 100 रुपए होती है।
1.5 करोड़ से 5 करोड़ के टर्नओवर पर लाइसेंस फीस 5 हजार रुपए होती है।
लाइसेंस तत्काल भी जारी होता है। हालांकि यह लाइसेंस बनने के बाद फूड विभाग के अफसर मौके पर जाकर जांच करते हैं।
लाइसेंस जरूर लें: फूड सामग्री कारोबार के लिए लाइसेंस जरूरी है। इसे लेने की प्रक्रिया बेहद आसान है। बस पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होता है। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन है। महज एक दिन में यह जारी हो जाता है। इसी तरह रिन्यूअल की प्रोसेस भी सरल है।
बसंतदत्त शर्मा, फूड ऑफिसर उज्जैन









