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बारिश में इन 4 चीजों से बचें, वरना खराब हो सकती है सेहत

तपती और चिलचिलाती धूप के बाद मानसून की फुहारें तन-मन को बेहद सुकून पहुंचाती हैं। हालांकि, यह खुशनुमा मौसम अपने साथ कई तरह के बैक्टीरिया, फंगस और जलजनित रोगों के पनपने का अनुकूल वातावरण भी लेकर आता है। इस समय हवा में नमी का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे सूक्ष्मजीव अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। यही वजह है कि बारिश के मौसम में खान-पान को लेकर बरती गई मामूली सी भी लापरवाही इंसानी सेहत को गंभीर रूप से बिगाड़ सकती है।

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इस सुहावने मौसम में केवल जुबान के स्वाद को तरजीह देने के बजाय भोजन की शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ख्याल रखना चाहिए। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों ही मानसून के दौरान कुछ खास खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह देते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं उन 5 चीजों के बारे में, जिन्हें इस ऋतु में खाने से पूरी तरह बचना चाहिए या बेहद सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए।

1. खुले में बिकने वाले कटे फल और रेहड़ी का जूस:

सड़क किनारे ठेलों पर मिलने वाले पहले से कटे हुए फल और खुले में तैयार होने वाले ताजे जूस इस मौसम में बीमारियों का सबसे बड़ा घर होते हैं। हवा में मौजूद रोगाणु और मक्खियां इन्हें बहुत जल्दी दूषित कर देती हैं। इनका सेवन करने से फूड पॉइज़निंग, डायरिया और पेट के गंभीर संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सेहतमंद रहने के लिए हमेशा घर पर लाकर अच्छी तरह धोए गए ताजे फलों का ही सेवन करें।

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2. स्ट्रीट जंक फूड और अत्यधिक तली-भुनी चीजें:

रिमझिम फुहारों के बीच गरमा-गरम समोसे, कचौड़ी और पकौड़े खाने की इच्छा होना स्वाभाविक है। लेकिन मानसून में हमारा पाचन तंत्र स्वाभाविक रूप से थोड़ा धीमा और कमजोर हो जाता है। ऐसे में भारी और वसायुक्त भोजन पचाने में पेट को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा, यदि बाजार में इन चीजों को बार-बार इस्तेमाल किए गए दूषित तेल में बनाया जा रहा है, तो यह आंतों के संक्रमण को सीधे निमंत्रण देना है।

3. हरी पत्तेदार सब्जियां (सावधानी आवश्यक):

यूं तो पालक, मेथी और पत्तागोभी को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है, मगर बारिश के मौसम में खान-पान की सूची में इन्हें शामिल करते वक्त अतिरिक्त सावधानी चाहिए। इन पौधों की परतों और पत्तों के बीच छोटे-छोटे कीड़े, उनके अंडे और हानिकारक बैक्टीरिया छिपे रहते हैं जो केवल साधारण पानी से धोने पर नहीं निकलते। यदि इन्हें खाना ही है, तो गुनगुने पानी में नमक डालकर अच्छी तरह साफ करें और पूरी तरह पकाकर ही खाएं।

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4. बासा और लंबे समय तक रखा भोजन:

उच्च आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) के कारण पके हुए भोजन में फंगस और बैक्टीरिया बहुत तेजी से अपनी कॉलोनी बना लेते हैं। फ्रिज में भी लंबे समय तक रखा हुआ या बार-बार गर्म किया हुआ बासा खाना खाने से आंतों में सूजन और उल्टी-दस्त की समस्या हो सकती है। हमेशा उतना ही भोजन पकाएं जितनी जरूरत हो, और हमेशा ताजा व गर्म भोजन करने की ही आदत डालें।

डॉक्टरी परामर्श कब है जरूरी?

इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित, सुपाच्य और सात्विक आहार सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसके बावजूद, यदि बारिश के मौसम में खान-पान की गड़बड़ी की वजह से आपको लगातार पेट में तेज दर्द, ऐंठन, मतली, दस्त या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे बैठने के बजाय तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क कर उचित इलाज शुरू करना चाहिए।

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