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शिप्रा में नहाने उतरे श्रद्धालु फिसलते हुए गहराई में पहुंचे

घाटों पर फैली गंदगी-गाद की सफाई शुरू, रोज पहुंच रहे हैं हजारों श्रद्धालु

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मौके पर मौजूद जवानों ने जान बचाई, हादसे के बाद घाटों पर सफाई शुरू

उज्जैन। मंगलवार सुबह रामघाट पर बड़ा हादसा टल गया। स्नान के लिए नदी में उतरे दो श्रद्धालु गहरे पानी मेें चले गए। मौके पर मौजूद होमगार्ड के जवानों ने तुरंत नदी में कूदकर दोनों की जान बचाई। इस घटना के बाद नदी किनारे घाटों की सफाई शुरू की गई।

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मंगलवार सुबह 6 बजे आंध्रप्रदेश के श्रद्धालुओं का परिवार रामघाट पर शिप्रा स्नान के लिए पहुंचा था। इस परिवार के दो व्यक्ति फुलाराम (६५) और रामा राव (५६) रामघाट पर राणोजी की छत्री के सामने शिप्रा में स्नान के लिए उतरे। उस वक्त पानी घाट पर था। लेकिन वहां गाद भी जमी थी। नहाने के लिए श्रद्धालु थोड़ा आगे बढ़े और गाद में फिसलते हुए आगे गहरे पानी में समा गए। मौके पर मौजूद लोगों ने मदद के लिए शोर मचाया तो घाट पर तैनात होमगार्ड और एसडीआरएफ के जवान तुरंत मदद के लिए पहुंचे।

जैकेट और बैग की मदद से लाए बाहर

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मौके पर मौजूद जवान सुरेश सोलंकी और श्याम सिंह ने दोनों श्रद्धालुओं की मदद के लिए पानी में छलांग लगा दी और अपने साथ ले गए जैकेट व बैग (ट्यूब) की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। घाट पर ही दोनों को प्राथमिक चिकित्सा दी गई। परिजन मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने दोनों जवानों की तत्परता की सराहना की। क्योंकि घटना के वक्त नदी में बहाव था। अगर मदद में थोड़ी-भी देर हो जाती तो हादसा बड़ा हो सकता था।

आम श्रद्धालुओं के अलावा इन दिनों श्राद्ध पक्ष के कारण तर्पण आदि के लिए रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु रामघाट क्षेत्र पर पहुंच रहे हैं। जो यहां स्नान कर धार्मिक कर्म-पूजन आदि करते हैं। इंदौर, देवास व उज्जैन में बारिश के कारण इन दिनों शिप्रा का जल स्तर आए दिन कम-ज्यादा होता रहता है। पानी उतरने के बाद घाटों पर भारी मात्रा में फिसलन युक्त गाद (मिट्टी) जमा हो जाती है, जिस कारण रोज कई श्रद्धालु गिरकर घायल होते हैं। ऐसे में यहां नियमित सफाई की दरकार है।

मंगलवार सुबह जब दो श्रद्धालु मौत के मुंह से बाहर आए तो पंडे-पुजारियों में सफाई को लेकर नाराजगी जाहिर की गई। इसके बाद होमगार्ड की सूचना पर नगर निगम ने घाटों की सफाई के लिए टीम भेजी। सुबह ९ बजे घाटों की सफाई शुरू हो गई थी। हालांकि जलस्तर अधिक होने के कारण स्नान के लिए घाट फिलहाल सुरक्षित नहीं है। ऐसे में होमगार्ड जवान सभी श्रद्धालुओं को नदी में उतरने की बजाय घाट पर बैठकर ही स्नान करने की सलाह दे रहे हैं।

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