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फ्रेंडशिप डे विशेष : तेरे बिना अधूरी है हर खुशी, तेरी दोस्ती में है मेरी जिंदगी… यारबाज दोस्तों में सीएम की जोड़ी भी शामिल

जिंदगी को जिंदादिली से जीने वाले दोस्तों की जोडिय़ां, जिनकी यारी वक्त की कसौटी पर खरी

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हरिओम राय. उज्जैन| कहते हैं दोस्ती वो रिश्ता है जो खून से नहीं दिल से जुड़ता है। ढाई अक्षर के इस छोटे से शब्द के हर युग में अमर किस्से हैं। त्रेता में राम-सुग्रीव, द्वापर में श्रीकृष्ण-सुदामा, श्रीकृष्ण-अर्जुन और कर्ण-दुर्योधन के नि:स्वार्थ मित्रता के अलावा कलियुग में भी कई उदाहरण मिलते हैं। उज्जैन में भी दोस्तों की कुछ जोडिय़ां मशहूर हैं।

इनमें सीएम डॉ. मोहन यादव के बालसखा डॉ. रवि सोलंकी, राजेश सिंह कुशवाहा, सुरेश मोढ़-राजेंद्र सुराना-सुरेश विजयवर्गीय, आनंद गोराना-योगेश मित्तल और रमण-सोमण की जोडिय़ां प्रमुख हैं। इन जोडिय़ों पर फिल्म ‘हम’ का गाना, एक-दूसरे से करते हैं प्यार हम, एक-दूसरे के लिए हैं बेकरार हम, सटीक बैठता है। फ्रेंडशिप डे के मौके पर यह यारियां न सिर्फ प्रेरणा देती हैं बल्कि बताती है कि दोस्ती वक्त, पद और पैसा नहीं सिर्फ भावनाएं देखती है।

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दोस्ती के 40 साल, बेमिसाल: शिखर पर होकर भी जमीन से जुड़े

40 साल पहले सीएम डॉ. मोहन यादव का जन्मदिन सेलिब्रेट करते डॉ.रवि सोलंकी, राजेश कुशवाहा और अन्य

दो स्तों की यह ऐसी जोड़ी है जो शिखर पर होते हुए भी जमीन से जुड़ी है। डॉ. मोहन यादव, डॉ. रवि सोलंकी और राजेश कुशवाहा की दोस्ती चर्चित है। 1985 में कॉलेज के दिनों से शुरू हुई दोस्ती 40 साल बाद आज भी उसी जिंदादिली के साथ बरकरार है। शुरुआती दिनों से कारोबार, राजनीति में पूरी तरह मोहनजी का साथ निभा रहे रवि सोलंकी और राजेश कुशवाह आज भी उसी शिद्दत से साथ खड़े हैं। मोहन जी दोनों दोस्तों को दो हाथ मानते हैं। दोनों परदे के पीछे रहकर मोहनजी का हर मोर्चे पर साथ निभा रहे हैं। रवि और राजेश जी कहते हैं रिश्ते बनाने के लिए नहीं, निभाने के लिए होते हैं।

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सामान खरीदने गए, फिर दोस्ती परिवार बन गई

सुरेश विजयवर्गीय, राजेंद्र सुराना, सुरेश मोढ़

होटल अंजुश्री के ऑनर सुरेश मोढ़, दिवंगत राजेंद्र सुराना और सुरेश विजयवर्गीय की दोस्ती भी मशहूर है। तीनों करीब 42 साल से साथ हैं। मोढ़ बताते हैं कि बहन की शादी का सामान खरीदने 1983 में राजेंद्र सुराना की दुकान पर गया था, फिर ऐसी दोस्ती हुई कि परिवार बन गया। हमारी जोड़ी में सुुरेश विजयवर्गीय भी साथ हो गए और साथ में कई प्रोजेक्ट किए। लाभ-हानि कभी नहीं देखी। कभी भी मनभेद की स्थिति नहीं बनी। आज हमारा परिवार और व्यापार साथ-साथ है। दो साल पहले राजेंद्र जी नहीं रहे लेकिन भतीजा अंकित व्यापार में हाथ बंटाता है।

स्कूल में दोस्त बने, फिर कारोबारी

आनंद (सफेद टी-शर्ट में) योगेश के साथ

रुद्राक्ष होटल एंड रिसोर्ट के ऑनर आनंद गोराना और योगेश मित्तल गहरे दोस्त हैं। पहली मुलाकात 1987 में माधवनगर हायरसेकंडरी स्कूल (अब स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) में हुई थी। दोनों की दोस्ती स्कूल-कॉलेज से होते हुए कारोबार तक पहुंची। 1994 में दोनों ने शेप इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी। फर्म खड़ी करने में दोनों ने जान लगा दी, योगेश ने ऑफिस संभाला तो आनंद ने फील्ड। कॉलोनी और भवन निर्माण के बाद दोनों ने 2016 में रुद्राक्ष रिसोर्ट शुरू किया। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी है कि इन्होंने शादी भी 5 दिन के अंतराल (20 व 24 जनवरी 198 ) में की और रिशेप्सन एक ही दिन दिया। बच्चों की पढ़ाई-विवाह से लेकर हर छोटे-बड़े निर्णय एक-दूसरे के बिना नहीं लेते।

जोड़ी ऐसी कि नाम उपनाम जुडक़र एक पहचान हो गए

रमन (टी-शर्ट में) विश्वजीत के साथ

रमन जायसवाल-विश्वजीत सोमण की दोस्ती ऐसी हुई कि अब एक का नाम और दूसरे का उपनाम पहचान बन गया है। लोग इन्हें रमन-सोमण के नाम से जानते हैं। यह जोड़ी कंस्ट्रक्शन व्यवसाय में चर्चित हैं। दोनों की दोस्ती 1983 में पॉलीटेक्निक कॉलेज से शुरू हुई थी। पढ़ाई के बाद दोनों ने पार्टनरशिप में काम शुरू किया। निर्माण कामों से आगे बढ़ते हुए अब दोनों चंदेसरी रिसोर्ट का संचालन कर रहे हैं।

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