मप्र में कॉन्स्टेबल बैंड भर्ती पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

इंटरव्यू रिजल्ट भी जारी नहीं होगा, अभ्यर्थी को बाहर रखने पर सरकार से मांगा जवाब
2 राउंड पास होने पर भी कैंडिडेट्स को इंटरव्यू में नहीं बुलाया
अक्षरविश्व न्यूज इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कॉन्स्टेबल (बैंड) भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है। उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने के तरीके पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। मामला याचिकाकर्ता नीलेशसिंह और मध्यप्रदेश शासन के बीच है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट गगन बजाड़ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा। वहीं, शासन की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल सुदीप भार्गव उपस्थित हुए। नीलेशसिंह ने 21 अगस्त 2026 को याचिका लगाई गई थी। कोर्ट को बताया था कि उन्होंने कॉन्स्टेबल (बैंड) पद की चयन प्रक्रिया के पहले और दूसरे राउंड को सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसके बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया के तीसरे राउंड यानी इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया।
उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक नहीं की
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह भी कहा कि विभाग ने अब तक पात्र उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक नहीं की है। भर्ती विज्ञापन में पदों की संख्या के तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने का जिक्र किया गया था। हालांकि, आरोप है कि केवल पदों की संख्या के दो गुना उम्मीदवारों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से उन्हें भी इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की।
कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह का समय दिया
कोर्ट ने राज्य के एडवोकेट को इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया और पात्र उम्मीदवारों की सूची के संबंध में सरकार से आवश्यक निर्देश लेने को कहा है। इसके लिए कोर्ट ने एक सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने फिलहाल इंटरव्यू के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। तब तक भर्ती के इंटरव्यू के परिणाम घोषित नहीं किए जा सकेंगे।
सरकार ने कहा- तय प्रक्रिया के तहत बुलाए उम्मीदवार
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध किया। शासन की ओर से कहा गया कि भर्ती के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। सरकार ने यह भी दलील दी कि इंटरव्यू पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं। ऐसे में अब याचिकाकर्ता को इंटरव्यू में शामिल होने का निर्देश देना उचित नहीं होगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों को बुलाने में अपनाई गई प्रक्रिया की जानकारी मांगी है।









