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जन्माष्टमी : कान्हा के रंग में रंगा बाजार, पोशाक-बांसुरी की डिमांड

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। माखनचोर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए शहर का बाजार सज गया है। अलग- अलग जगह पर दुकानें व ठेलागाड़ी लगने शुरू हो गए हैं। फ्रीगंज बाजार में भी रौनक बढऩे लगी है। बाजार में लड्डू गोपाल और भगवान श्रीकृष्ण के आकर्षक वस्त्रों के साथ बांसुरी, मोरपंख, मुकुट, झूले और शृंगार की अन्य सामग्री लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। जन्माष्टमी नजदीक आने के साथ श्रद्धालु अपने घरों में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण के लिए खरीदारी भी कर रहे हैं।

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क्या कहते हैं व्यवसायी

सेठी नगर में जन्माष्टमी शृंगार एवं सजावट सामग्री की दुकान लगाने वाले पंडयाखेड़ी के ऋषि मोकाटे ने बताया कि विभिन्न आकार और डिजाइन के वस्त्र उनकी दुकान पर उपलब्ध हैं। यहां झूले, आकर्षक वस्त्र, बांसुरी पगड़ी, मुकुट एवं मोरपंख जैसे सामान आए हैं।ग्राहक भी खरीदी में रुचि ले रहे हैं।

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फ्रीगंज में पिछले 15 वर्षों से राधा-कृष्ण वस्त्रालय का संचालन करने वाले राजेश गुप्ता ने बताया कि फिलहाल शाम से देर रात तक ग्राहकी अच्छी है। पोशाकें, मुकुट, बांसुरी और अन्य श्रृंगार सामग्री मथुरा-वृंदावन और गुजरात से आए हैं। उनका दावा है कि फ्रीगंज बाजार में कृष्ण भगवान की पोशाकों की बिक्री उन्होंने ही शुरू की थी।

अशोकनगर में रहने वाले और शहीद पार्क पर दुकान लगाने वाले अनिल मालवीय निगम प्रशासन की व्यवस्था से नाराज दिखें। उनका कहना है कि कजऱ् लेकर सामान खरीदा। मगर निगम ने दुकान मुख्य बाजार से हटाकर यहां भेज दी। ं चुनिंदा ही ग्राहक आ रहे हैं। अगर सामान की बिक्री ही नहीं हुई तो आर्थिक बोझ बढ़ेगा। पहले दुकान की रसीद के नाम पर 30 रुपए लेते थे मगर इस बार यह राशि 50 रुपए कर दी है।

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श्रद्धालुओं ने कहा : हर चीज में एक अलग ही आनंद और अपनापन

जन्माष्टमी को लेकर उत्सुकता है। इस बार मैंने कान्हा के लिए सुंदर पीले रंग की पोशाक, चंदन की महक वाला इत्र, और विशेष रूप से उनकी बांसुरी पर सजाने के लिए एक छोटा सा मोरपंख चुना है। बेटे के लिए भी कान्हा की ड्रेस खरीदी है। फैमिली के साथ मैने खरीदी की तो हर एक वस्तु को चुनते समय ऐसा लग रहा था मानो मैं खुद ब्रज की गलियों में डोल रही हूँ। बहुत ही प्यारे प्यारे वस्त्र हैं। साज़ सज्जा के समान बाजार में देखने को मिल रहे है।
-विहान एवं कृष्णा पंडित
नानाखेड़ा उज्जैन

मेरे घर में राधा रमण जी की सेवा होती है । जन्माष्टमी पर्व पर घर पर ही कान्हा जी का अलौकिक शृंगार करती हूं। मैंने गुलाबी कलर वाली मोतियों के वर्क वाली ड्रेस ली है। साफा भी खरीदा है।
-रचना श्रीवास्तव,
नागेश्वरधाम आगर रोड़ उज्जैन

कृष्ण भगवान से लगाव है। विशेष कर जन्माष्टमी पर मेरे परिवार में भी इसकी तैयारी काफी पहले से शुरू हो जाती है। इसकी तैयारियों के चलते भगवान के लिए पोशाक और शृंगार के समान खरीदने आया हूं।
-अक्षत परमार, आगर रोड उज्जैन

इस बार लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव को लेकर उत्सुकता ज्यादा ही है। यशोदानंदन के शृंगार की तैयारियों के लिए आनंदित है। नंदलाल का शृंगार कैसे और भी सुंदर, मनमोहक और दिव्य बनाया जाए। उनकी छोटी-छोटी तैयारियों से लेकर शृंगार के हर एक आभूषण तक, हर चीज़ में एक अलग ही आनंद और अपनापन महसूस होता है।
-झलक शिकारी
तीन बत्ती चौराहा उज्जैन

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