‘देवदूत’ बनी खाकी : सीपीआर देकर प्रधान आरक्षक ने यात्री को दी नई जिंदगी

उज्जैन। लोगों की जान बचाने के लिए पुलिसकर्मियों को दी जाने वाली मेडिकल संबंधी ट्रेनिंग के सुखद परिणाम दिखने लगे है। एक सप्ताह में दूसरी बार खाकी वर्दीधारी ने सीपीआर देकर आम नागरिक की जान बचाई है। इस बार एक प्रधान आरक्षक देवदूत बनकर उभरे और 30 साल के युवक की जिंदगी बचा ली। उज्जैन का रेलवे स्टेशन। साल का पहला दिन था और महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ थी कि पूरा ही खचाखच भरा था।

प्लेटफार्म नंबर 6 पर शाम करीब पौने पांच बजे, भीड़ के बीच एक परिवार ट्रेन का इंतजार कर रहा था। एकाएक इस परिवार में शामिल 30 साल का नौजवान देवीलाल पिता रामचंद्र निवासी ब्यावरा(राजगढ़) गश खाकर गिर पड़ा। साथ आई पत्नी और मां बिलखने लगे। मां और दादी को रोता देखकर साथ आया बच्चा भी बिलखने लगा था। आसपास लोगों की भीड़ उमड़ गई, हर कोई केवल देख ही रहा था,
राय दे रहा था पर कोई कुछ कर नहीं सका। इतने में ही प्लेटफार्म पर ड्यूटी दे रहे प्रधान आरक्षक पवन धुर्वे यहां पहुंचे। उन्होंने देवीलाल की दिल की धड़कन जांची, कोई हलचल नहीं थी। प्रधान आरक्षक ने बिना देर किए देवीलाल की सीना दबाना शुरू किया। करीब 10 मिनट के बाद देवीलाल की सांस लौट आई। वह पूरी तरह से होश में आ गया। प्रधान आरक्षक ने उसे और उसके पूरे परिवार को ट्रेन में बैठाकर रवाना किया।









