सम्राट विक्रमादित्य विवि में सीखिए टैंपल मैनेजमेंट

देश का पहला टैंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू, युवाओं को नए क्षेत्र में करियर बनाने का मिलेगा मौका
सुमित सोलंकी उज्जैन। देशभर के मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में प्रशिक्षित प्रबंधकों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में टैंपल मैनेजमेंट पाठयक्रम शुरू हो गया है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कोर्स की घोषणा इंदौर में की थी।
सम्राट विक्रमादित्य विवि की सतत शिक्षा अध्ययनशाला में देश के पहले टैंपल मैनेजमेंट पाठ्यक्रम में प्रवेश की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। पाठयक्रम का मकसद धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के लिए कुशल पर्सन तैयार करना है। मौजूदा समय में देश में बड़े मंदिरों और धार्मिक ट्रस्टों का संचालन हो रहा है। फिलहाल इनकी कमान सेवानिवृत्त शासकीय अधिकारी या निजी संस्थानों के मनोनीत लोग कर रहे हैं। मौजूदा जरूरतों को देखते हुए मंदिरों का प्रबंधन भी बदला है, अब मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं हैं, यहां ं क्राउड मैनेजमेंट, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, हाउसकीपिंग मैनेजमेंट और एचआर प्रबंधन की जरूरत होती है। ऐसे में मंदिरों के प्रबंधन के लिए पेशेवर तैयार करने के लिए यह कोर्स डिजाइन किया गया है।
थ्योरी और प्रेक्टिकल दोनों पर फोकस
सतत अध्ययनशाला के निदेशक डॉ. सुशील शर्मा ने बताया कि दो वर्षीय एमबीए टैंपल मैनेजमेंट कोर्स में 30 सीट है। एडमिशन मेरिट के आधार पर हो रहे हैं। कोर्स की सालाना फीस 31,640 रुपए है, जो कि एमबीए पाठयक्रम की सबसे कम फीस है। शर्मा के मुताबिक कोर्स में थ्योरी और प्रेक्टिकल दोनों पर फोकस रहेगा। महाकाल मंदिर और बड़े मंदिर में विद्यार्थियों को इंटर्नशिप कराई जाएगी। इससे उन्हें व्यवहारिक अनुभव हासिल होगा और कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें रोजगार में दिक्कत नहीं आएगी।
शर्मा बताते हैं कि जैसे अभी अयोध्या के श्रीराम मंदिर में सीईओ पद की नियुक्ति निकली है। भविष्य में ऐसे ही वैकेंसी अन्य मंदिर भी मैनेजमेंट के लिए निकालेंगे। अयोध्या के श्रीराम मंदिर, तिरुपति, श्री वैष्णो देवी धाम, महाकालेश्वर सहित देश के विभिन्न मंदिरों और धार्मिक ट्रस्टों में भविष्य में प्रशिक्षित टैंपल विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। ऐसे में यह पाठयक्रम करियर का नया विकल्प होगा।









