श्री जगन्नाथ कल लौटेंगे घर, शाम को शुरू होगी शोभायात्रा

विक्रमादित्य शोध मंदिर में बने गुंडीचा मंदिर में हो रहे हैं प्रवचन और सांस्कृतिक आयोजन
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शहर में चल रहा श्रीजगन्नाथ महोत्सव अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है। विक्रमादित्य शोध मंदिर में बने गुंडीचा मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ भाई बलराम और बहन सुभद्रा महारानी के साथ विराजित हैं। प्रतिदिन प्रवचन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के गुणगान में लीन हैं। महोत्सव का समापन शुक्रवार को भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा महारानी की वापसी रथयात्रा के साथ होगा।
शुक्रवार दोपहर 3 बजे पांडु विजय अनुष्ठान के बाद 3.30 बजे भगवान को रथ में विराजित किया जाएगा। 3.45 बजे भोग आरती के बाद शाम 4 बजे रथयात्रा इस्कॉन मंदिर के लिए रवाना होगी। रथयात्रा देवास रोड, सर्किट हाउस, पुलिस लाइन, तारामंडल चौराहा और बिरला अस्पताल चौराहा होते हुए शाम लगभग 7 बजे इस्कॉन मंदिर पहुँचेगी। यात्रा में ताशा दल, कीर्तन मंडली और नृत्य दल शामिल रहेंगे। इसमें रंगनाथाचार्य महाराज, अवधेशपुरी महाराज विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
आज शाम भजन, नृत्य व नाटक का मंचन
महोत्सव के तहत गुरुवार शाम गुंडीचा मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मंजूरी बनर्जी के भजन, कल्पतरु ग्रुप द्वारा नृत्य और बिल्वमंगल नाटक का मंचन किया जाएगा।
प्रवचन : हड्डी और मांस की तरह है प्लास्टिक
गुंडीचा मंदिर में बुधवार शाम को कार्यक्रम में वडोदरा इस्कॉन के अध्यक्ष वासुघोष ने कहा कि प्लास्टिक को संस्कृत में संधि विच्छेद करें तो प्ला का अर्थ है मांस तथा स्टिक याने अस्थि। प्लास्टिक मांस और हड्डी की तरह है। इसके उपयोग पर प्रतिबंध होना चाहिए। यह पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है।
बुधवार शाम को यहां कपिल मुनिजी के प्रवचन हुए। उन्होंने बताया जगन्नाथ की सबसे बड़ी कृपा उनका महाप्रसाद है। उन्होंने कहा जगन्नाथ का रूप गोपियों का भाव है। कृष्ण महारूप में जगन्नाथ रूप ले लेते हैं। भगवान जगन्नाथ इतने कृपालु हैं जब कोई भक्त मंदिर के अंदर आकर उनके दर्शन न कर पाए तब जगन्नाथ खुद अपने श्री मंदिर से बाहर आकर दर्शन देते है। जगन्नाथ की कृपा सिर्फ जगन्नाथ की सेवा करके ही मिलती है।









