धनतेरस पर महालक्ष्मी योग खरीदारी में राहु काल का ध्यान रखें

दीपावली के पंचपर्व का शुभारंभ धनतेरस से होता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस इस बार शुक्रवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार धनतेरस पर खास संयोग बन रहा है।
उज्जैन। शुक्रवार के दिन पर्व पडऩे के साथ ही शुक्र और चंद्रमा के कन्या राशि में एक साथ रहने से महालक्ष्मी योग बनेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित रामचंद्र नायक के अनुसार यह संयोग धन, समृद्धि, ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं में वृद्धि के लिए विशेष शुभ माना जाता है, लेकिन खरीदारी के लिए राहु काल का ध्यान रखना जरूरी है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे तक रहेगी। धनतेरस में संध्याकालीन पूजन का विशेष महत्व होने के कारण पर्व 6 नवंबर को ही मनाया जाएगा। शुक्रवार को धनतेरस होना अपने आप में शुभ संयोग है, क्योंकि शुक्र को धन, ऐश्वर्य और माता लक्ष्मी का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। ऐसे में इस दिन खरीदारी और पूजन करना विशेष फलदायी रहेगा।
ऐसे करें पूजा-अर्चना
पूजास्थल पर चावल या गेहूं की छोटी ढेरी बनाकर उस पर घी का दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए श्रीसूक्त का तीन बार पाठ करें। इसके बाद भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं का पूजन कर मिठाई का भोग लगाएं। परिवार के साथ सुख-समृद्धि की कामना करें।
यम दीपदान लाभकारी
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, धनतेरस की शाम मुख्य द्वार के दोनों ओर मिट्टी के दीपक में तिल का तेल भरकर पूरी रात जलने दें। बायीं ओर का दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर करके यमदेव को समर्पित किया जाता है, जबकि दायीं ओर का दीपक धन्वंतरि व कुबेर के लिए जलाया जाता है।
मुहूर्त
दोपहर 12:03 से 1:24 बजे तक शुभ चौघडिय़ा।
शाम 4 से 7:30 बजे तक चर चौघडिय़ा।
रात 8:46 से 10:30 बजे तक लाभ चौघडिय़ा।









