कारोबारियों को बड़ी राहत की तैयारी

जीएसटी परिषद की सात अक्टूबर को होने वाली बैठक में कई व्यापक सुधारों को मिल सकती है मंजूरी
नईदिल्ली, एजेंसी। जीएसटी परिषद की सात अक्टूबर को होने वाली बैठक में व्यापक सुधारों को मंजूरी दी जा सकती है। इसके तहत कर विवादों से निपटने में गिरफ्तारी के बजाय कर वसूली, ब्याज और जुर्माने पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है। साथ ही जीएसटी के तहत आने वाले 24 अपराधों में बदलाव की तैयारी है।
इनमें से नौ अपराधों को पूरी तरह हटाने और 11 अपराधों को मौजूदा रूप में बनाए रखने का प्रस्ताव है। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाया जा सकता है। इससे अदालत के लिए हर मामले में जेल की सजा देना अनिवार्य नहीं रहेगा और जुर्माना लगाने का विकल्प उपलब्ध होगा।
मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा तीन साल से घटाकर दो साल करने का भी प्रस्ताव है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि वस्तुओं या सेवाओं के वर्गीकरण, मूल्य तय करने या इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को लेकर होने वाले सामान्य विवादों को आपराधिक कार्रवाई के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में कारोबारी और कर अधिकारी किसी लेनदेन की अलग-अलग व्याख्या कर सकते हैं। ऐसे विवादों में कर, ब्याज और जुर्माने के जरिये मामला निपटाने पर जोर दिया जा सकता है।
इन प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर
सही खरीदार का आईटीसी सुरक्षित
ऐसे खरीदारों के आईटीसी को सुरक्षित रखने पर भी विचार, जिनके पास खरीद का वैध बिल है। यदि आपूर्ति शृंखला में पहले के विक्रेता ने कर नहीं चुकाया है, तो बोझ सही खरीदार पर डालने के बजाय संबंधित विक्रेता से वसूली की जाएगी। इससे उन्हें राहत मिल सकती है, जो छोटे या नए कारोबारियों से सामान खरीदती हैं।
कर विवाद निपटाने के लिए नियम आएंगे
परिषद कर मांग तय करने और उस पर फैसला लेने के लिए एक समान नियम बनाने का विचार है। इनमें नोटिस तैयार करने और पहुंचाने, सामान्य कर की कमी को धोखाधड़ी से अलग करने जैसे नियम हैं।
माल ढुलाई में बार-बार जांच रोकने की सिफारिश
अन्य प्रस्ताव में खुफिया जानकारी के आधार पर मालवाहक वाहनों की जांच की व्यवस्था बनाने की बात है। किसी वाहन को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारी की पहले मंजूरी जरूरी होगी। आम तौर पर जांच उसी राज्य में की जा सकेगी, जहां से माल रवाना हुआ है। दस्तावेज नहीं होने या खरीदार की ओर से कर देय होने जैसी स्थितियों में इसके अपवाद होंगे।
छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को राहत
छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को उन राज्यों में भी जीएसटी पंजीकरण की सुविधा शामिल है, जहां उनका कार्यालय नहीं है। ऐसे कारोबारी उन राज्यों में ई-कॉमर्स मंच के गोदाम को अपना कारोबारी पता बता सकेंगे। इसके लिए एक राज्य में वास्तविक कारोबारी मौजूदगी, भौतिक जांच और आधार प्रमाणीकरण जरूरी होगा।
दस हजार से कम की कर मांग पर नोटिस नहीं
मुकदमों और कर विभाग का प्रशासनिक बोझ घटाने के लिए 10,000 रुपए से कम की कर मांग वाले मामलों में नोटिस जारी करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। ऐसे मामले 20 फीसदी हैं, लेकिन इनमें कर की राशि कम है। यह व्यवस्था पुराने मामलों पर भी लागू हो सकती है, चाहे वे कर निर्धारण या अपील के स्तर पर हों।
जीएसटी पंजीकरण अब आसानी से होगा
जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया को भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। नई व्यवस्था में आवेदक को वही जानकारी वाले हिस्से दिखेंगे जो उसके कारोबार से संबंधित हैं। साथ ही जरूरी दस्तावेजों की सूची भी स्पष्ट रूप से दी जाएगी। कई राज्यों में पंजीकरण कराने वाले कारोबारी आवेदन एक साथ पूरा कर सकेंगे।









