Popup Image
Advertisement

पीओके में भड़का जनाक्रोश, विरोध दबाने में जुटी पाक सरकार

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस्लामाबाद की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जनता का आक्रोश अब एक बड़े जन विद्रोह का रूप ले चुका है। अवामी एक्शन कमेटी (AAC) के नेतृत्व में चल रहा यह व्यापक आंदोलन लगातार 17वें दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रहा। स्थानीय नागरिकों और आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस स्वतःस्फूर्त विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार बेहद अमानवीय और क्रूर हथकंडे अपना रही है।

Advertisement

आंदोलन दबाने के लिए राशन की सप्लाई रोकी, भुखमरी के हालात

प्रदर्शनकारियों को घुटनों पर लाने के लिए प्रशासन ने अब आवश्यक वस्तुओं की किल्लत पैदा करना शुरू कर दिया है। इसके तहत अपनाई जा रही रणनीतियां इस प्रकार हैं:

  • प्रवेश मार्गों पर नाकेबंदी: पाकिस्तान के मुख्य हिस्सों से पीओके को जोड़ने वाले सभी प्रमुख रास्तों और एंट्री पॉइंट्स पर प्रशासन ने कड़ा पहरा लगा दिया है।
  • रसद ट्रकों पर रोक: स्थानीय समुदाय पर दबाव बनाने के लिए खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी सामानों से लदे सैकड़ों ट्रकों को जानबूझकर रास्ते में ही रोक दिया गया है, जिससे क्षेत्र में जरूरी चीजों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

सरकारी कर्मचारियों पर गाज: 128 कर्मी बर्खास्त, पूर्व सैनिकों को धमकी

प्रशासनिक स्तर पर विरोध की आवाज को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का भी दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों और पूर्व सैनिकों में भारी नाराजगी है:

Advertisement
  • नौकरियों से बर्खास्तगी: इस जन आंदोलन में हिस्सा लेने या इसका समर्थन करने के आरोप में प्रशासन ने अब तक 128 सरकारी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
  • पेंशन रोकने की धमकी: आंदोलन के शीर्ष नेताओं ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र के सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों (रिटायर्ड सैनिकों) को भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी गई है। उन्हें साफ कहा गया है कि यदि वे इन प्रदर्शनों में शामिल हुए, तो उनकी पेंशन स्थायी रूप से रोक दी जाएगी।

हिंसक कार्रवाई में कई मौतें, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां

स्थिति को नियंत्रित करने के नाम पर सुरक्षाबलों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई में अब तक दर्जनों स्थानीय लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, आंदोलन को कमजोर करने के लिए बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ गंभीर कानूनी धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। हालांकि, इन तमाम आरोपों के उलट स्थानीय प्रशासन का दावा है कि वे केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल उपद्रवियों के खिलाफ ही कार्रवाई कर रहे हैं।

Advertisement

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें