Advertisement

राइजिंग स्टार : पुनीत कड़वाने ने रंगों के दम पर मुंबई तक बनाई अपनी अलग पहचान

सुमित कुमार उज्जैन। कला की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाना केवल प्रतिभा का परिणाम नहीं होता, बल्कि इसके पीछे निरंतर अभ्यास, धैर्य और जोखिम उठाने का साहस भी होता है। शहर के 24 वर्षीय युवा कलाकार पुनीत कड़वाने इसी सफर का एक उभरता हुआ नाम हैं। स्कूल स्तर की चित्रकला प्रतियोगिताओं से शुरू हुई उनकी कला यात्रा आज देश के प्रमुख कला मंचों तक पहुंच चुकी है और उनकी पहचान एक ऐसे युवा कलाकार के रूप में बन रही है, जो अपनी अलग कलात्मक भाषा विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।

Advertisement

अखबार पर दिखाते थे अपनी कला

चित्रकला में रुचि बचपन से ही थी, पेरेंट्स के अनुसार वह अखबार पत्र पर अपनी कला को दिखाया करते थे। समय के साथ यह रुचि केवल शौक तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने इसे अपने कॅरियर और पहचान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। चित्रकला में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद वे मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स की पढ़ाई भी पूरी कर चुके हैं।

Advertisement

मौलिक शैली से बनती है पहचान- उनकी कलाकृतियों में आध्यात्मिकता, पौराणिक कथाएं, भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ और समकालीन अभिव्यक्ति का प्रभाव दिखाई देता है। पुनीत मानते हैं कि किसी भी कलाकार की वास्तविक पहचान उसकी मौलिक शैली से बनती है। जिस तरह संगीत की दुनिया में हर गायक की अपनी अलग आवाज होती है, उसी तरह एक चित्रकार की भी अपनी रंग योजना, टेक्सचर और दृश्य भाषा होनी चाहिए। यही विचार उन्हें केवल चित्र बनाने के बजाय अपनी विशिष्ट कलात्मक पहचान विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।

मुंबई में सोलो प्रदर्शनी बनी महत्वपूर्ण उपलब्धि
पुनीत कड़वाने की कला यात्रा की प्रमुख उपलब्धियों में वर्ष 2024 में मुंबई के नेहरू सेंटर आर्ट गैलरी में आयोजित उनकी सोलो प्रदर्शनी ‘डिवाइन’ शामिल है। एक युवा कलाकार के लिए प्रतिष्ठित कला मंच पर व्यक्तिगत प्रदर्शनी आयोजित करना कला जगत में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से उन्होंने अपनी कलात्मक सोच और विषयों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया। उनकी कलाकृतियां भारत के साथ-साथ विदेशों में भी निजी संग्रहकर्ताओं तक पहुंच चुकी हैं।

Advertisement

सूक्ष्म कला में बनाए छह विश्व रिकॉर्ड

पुनीत की कला का एक महत्वपूर्ण पक्ष सूक्ष्म चित्रकला भी है। बेहद छोटी सतहों पर बारीकी के साथ चित्र बनाना उनकी विशेषताओं में शामिल है। अब तक वे सूक्ष्म कला के क्षेत्र में छह विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने सरसों के दाने, चने, चीनी के कण और बॉलपेन की नोक जैसी बेहद छोटी सतहों पर चित्र बनाकर विभिन्न विश्व रिकॉर्ड संस्थाओं में अपनी उपलब्धियां दर्ज कराईं।

देश के प्रमुख कला मंचों तक पहुंच- राष्ट्रीय स्तर पर पुनीत मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, जयपुर, हैदराबाद, बेंगलुरु और चंडीगढ़ सहित विभिन्न शहरों में आयोजित कला प्रदर्शनियों में अपनी भागीदारी दर्ज करा चुके हैं। वर्ष 2026 में मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी और चेन्नई के प्रमुख कला मंचों पर उनकी भागीदारी उनकी बढ़ती कला यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रही है। अब उनका अगला लक्ष्य अपनी कला को और व्यापक मंच तक पहुंचाना है। पुनीत इन दिनों अक्टूबर में आयोजित होने वाली आगामी प्रदर्शनी की तैयारियों में जुटे हुए हैं। इसके लिए वे नई कलाकृतियों और विषयों पर काम कर रहे हैं।

देश के बड़े मंचों तक बनाई जगह- उज्जैन से शुरू हुई पुनीत कड़वाने की रंगों भरी यात्रा अब देश के बड़े कला मंचों तक पहुंच चुकी है। छह विश्व रिकॉर्ड, प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं में प्रदर्शनियां और आगामी प्रदर्शनी की तैयारियों के बीच पुनीत लगातार अपनी अलग कलात्मक पहचान गढ़ रहे हैं। यही निरंतरता उन्हें आने वाले समय के एक उभरते हुए राइजिंग स्टार के रूप में स्थापित करती है।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें