सरपंच ने सरकारी जमीन कराई रिश्तेदारों के नाम

कार्रवाई: आर्थिक अपराध शाखा ने सात लोगों के खिलाफ दर्ज किया भ्रष्टाचार का अपराध

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने रतलाम जिले के पिपलोदा ब्लॉक की रियावन ग्राम पंचायत की पूर्व महिला सरपंच, दो पंचायत सचिव और सरपंच के चार रिश्तेदारों के खिलाफ सरकारी जमीन में हेराफेरी का अपराध दर्ज किया है। करीब एक साल से इस मामले की जांच चल रही थी, जांच के दौरान दस्तावेजी सबूत हाथ लगने के बाद अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
रियावन गांव के एक रहवासी ने आर्थिक अपराध शाखा मुख्यालय को मामले की शिकायत की थी। सोमवार को उज्जैन स्थित कार्यालय में जमीन की हेराफेरी से जुड़े मामले में पूर्व सरपंच सूरजबाई पति निर्भयराम धाकड़, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव घनश्याम सूर्यवंशी निवासी रानीगांव, अशोक पिता राधेश्याम परमार निवासी मुंदड़ाकला, सरपंच के रिश्तेदार चमनलाल पिता बंशीलाल धाकड़, राजेश पिता अशोक धाकड़, टीना पति राहुल धाकड़ और उमा पति अशोक धाकड़ के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की 6 अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया है। यह अपराध रियावन गांव में बस स्टैंड से सटी सरकारी भूमि में हेरफेर कर उसे निजी बनाने और इसके बाद रिश्तेदारों के जरिए घुमाफिरा कर खुद की बहू को जमीन का मालिकाना हक दिलाने से जुड़ा है।
कैसे हुआ जमीन घोटाला
रियावन स्थित बस स्टैंड के नजदीक ग्राम आबादी के सर्वे क्रमांक 1411 की करीब 3 हजार वर्गफीट सरकारी शासकीय जमीन थी।
2019 में सूरजबाई धाकड़ यहां की सरपंच थीं , तब उन्होंने तत्कालीन सचिव घनश्याम सूर्यवंशी के साथ मिलकर ग्राम पंचायत में रखी संपत्ति पंजी को नष्ट करवा दिया। पंजी नष्ट होने के बाद उन्होंने 3 हजार वर्गफीट शासकीय जमीन के कूटरचित दस्तावेज बनवाए और पंचायत के रिकॉर्ड में जमीन के तीन बंटाकन दर्शाकर अपने ही दामाद चमनलाल धाकड़, बेटे के साले राजेश धाकड़ को और बेटे के साले की पत्नीटीना धाकड़ को भू स्वामित्व प्रमाण पत्र जारी करवा दिए।
यह पूरा घटनाक्रम साल 2019 का है। रिश्तेदारों के नाम से सरकारी जमीन के तीन अलग-अलग टुकड़े करने के बाद जनवरी 2020 में खुद की बहू उमा धाकड़ के नाम करवा लिया। तीनों ही फर्जी भू-अधिकार स्वामित्व प्रमाण पत्र पाने वाले रिश्तेदारों ने उमा धाकड़ के नाम रजिस्ट्री करवा दी। इस तरह गांव की करीब 3 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन घूम फिरकर सरपंच के परिवार के स्वामित्व की हो गई।









