सफलता : नीलगाय पकडऩे के अभियान में केसूनी में मिली बड़ी सफलता

3 घंटे उड़ा राबिनसन 120 नीलगाय 1 हिरण बोमा में घेर लाया
कल लौट जाएगी साउथ अफ्रीकन टीम
दीपक कुवाल कैसूनी/उज्जैन। उज्जैन तहसील के गांवों में किसानों के लिए मुसीबत बनी नीलगायों को पकडऩे के अभियान में सोमवार को बड़ी सफलता हाथ लगी। राबिनसन-44 हेलिकॉप्टर ने तीन घंटे तक उड़ान भरी और केसूनी की 365 बीघा में फैली बीड़ में बने बोमा में 120 नीलगायों और एक ब्लैक बग (काले हिरण) को घेर लाया। इन सभी को गांधीसागर भेजा गया है। अभियान मंगलवार को भी चलेगा। बुधवार को साउथ अफ्रीकन टीम लौट जाएगी। अभियान देखने राजस्थान फॉरेस्ट के अफसर भी पहुंचे।
दरअसल, उज्जैन के दताना-मताना, ब्रजराजखेड़ी, केसूनी, हासामपुरा और ताजपुर में नीलगाय का आतंक है। यह किसानों की फसलें चट कर जाती हैं और उन्हें रौंदकर नुकसान भी पहुंचाती हैं। अचानक सड़क पर आकर राहगीरों और वाहनचालक को नुकसान भी पहुुंचाती हैं। ऐसे में इनको पकडऩे के लिए वन विभाग सक्रिय हुआ है। शाजापुर में ब्लैग बग (काले हिरण) पकडऩे आई साउथ अफ्रीकन टीम को नीलगाय के लिए उज्जैन बुलाया गया था। 15 सदस्यीय टीम ने शुरुआत ब्रजराजखेड़ी से की थी। यहां बोमा लगाया गया था। रविवार को हेलिकॉप्टर के माध्यम से नीलगायों की घेराबंदी भी की गई लेकिन मुफीद स्थल नहीं होने से सिर्फ 2 ही नीलगाय पकड़ी जा सकी थीं। इन्हें गांधी सागर भेजा गया था।
365 बीघा में स्थित कैसूनी बीड़ में आसानी से घेरा
केसूनी में 365 बीघा जमीन पर स्थित बीड़ को साउथ अफ्रीकन टीम ने बोमा के लिए उपयुक्त पाया था। रविवार पूरी रात टीम यहां बोमा के लिए काम करती रही। सोमवार सुबह भी बोमा की बाड़ घेरी गई और फिर हेलिकॉप्टर राबिनसन-44 ने उड़ान शुरू की। आसपास के 15 किलोमीटर मेें मौजूद नीलगायों को हेलिकॉप्टर से घेरकर बोमा तक लाया गया। इनके बीच एक ब्लैक बग भी आ गया। शाम को जब गिनती की गई तो 120 नीलगाय और एक ब्लैक बग पकड़े गए थे। इनको तत्काल बड़े कवर्ड ट्रकों में लादकर गांधीसागर ले जाया गया।
राजस्थान की टीम पहुंची बोमा देखने
सोमवार को राजस्थान की टीम बोमा देखने पहुंची। डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन सहित दो आईएफएस अफसर राजस्थान से अभियान देखने आए थे। उन्होंने हेलिकॉप्टर से चल रहे रेस्क्यू अभियान को देखा। वन्यजीवों की हर्डिंग, बोमा में उनकी एंट्री और फिर यहां से सुरक्षित रेस्क्यू की प्रोसेस को समझा। मैदानी अमले ने भी उनके साथ अपने अनुभव साझा किए।
एसडीओ विक्रम सिंह सोलंकी ने मंगलवार को भी केसूनी में शेष नीलगायों को पकडऩे का अभियान चलेगा। चूंकि साउथ अफ्रीकन टीम का वीसा 7 नवंबर तक ही वैध है, ऐसे में वह अपनी प्रोसेस हर हाल में मंगलवार को पूरी कर अगली यात्रा के लिए निकल जाएंगे।
क्षेत्र को क्या होगा फायदा
किसानों को फसल नुकसानी से राहत मिलेगी।
अचानक सड़क पर आने से होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा।
चूंकि नीलगाय वन्यजीव है तो उनको वनों में सुरक्षित संरक्षित किया जा सकेगा।
यह रखी सावधानी
गांववालों को बोमा स्थल पर नहीं जाने दिया।
खेतों में किसान अपना काम रोजाना की तरह नियमित करते रहे।









