अरावली केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फैसले पर लगाई रोक

नई दिल्ली। सोमवार को अरावली पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर्वत श्रृंखला की नई परिभाषा पर पिछले महीने दिए गए अपने ही आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल, इससे पहले के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्यकर्ताओं और वैज्ञानिकों का आरोप था कि यह नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के विशाल क्षेत्रों को अवैध और अनियमित खनन के लिए खोल सकता है।

मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि हम समिति की सिफारिशों और इस न्यायालय के निर्देशों को स्थगित रखना आवश्यक समझते हैं। (नई) समिति के गठन तक यह स्थगन प्रभावी रहेगा।
वहीं, मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संघीय सरकार और चार संबंधित राज्यों को नोटिस जारी किया। वहीं, विशेषज्ञों के एक नए पैनल के गठन का निर्देश दिया और अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी तय की।
उल्लेखनीय है कि ये पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ, जब केंद्र सरकार ने अपनी नई परिभाषा को अधिसूचित किया, जिसके बारे में कार्यकर्ताओं और एक्सपर्ट्स ने आरोप लगाया कि इसे पर्याप्त मूल्यांकन या सार्वजनिक परामर्श के बिना तैयार किया गया था। कहा जा रहा था कि इससे हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली के बड़े हिस्से खनन के खतरे में पड़ सकते हैं।
इसी साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को क्षेत्र में किसी भी नई खनन संबंधी गतिविधि की अनुमति देने से पहले सतत खनन के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। आज सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से बहस करते हुए सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने बताया कि अदालत ने पिछले महीने उस योजना को स्वीकार कर लिया था।









