इतिहास के साथ विरासत संरक्षण व रोजगार दे रहा पुरातत्व विभाग

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विवि की प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला में इतिहास के साथ प्रैक्टिकल और करियर आधारित शक्षा दी जा रही है। 1969 में स्थापित इस विभाग में फील्ड विजिट, प्रोजेक्ट और म्यूजियम के जरिये स्टूडेंट को ट्रेंड किया जा रहा है।
यह कोर्स उपलब्ध
बी.ए. ऑनर्स (इतिहास), एम.ए. प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व, एम.ए. इतिहास प्लेन, पीजी डिप्लोमा इन टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट और पीजी डिप्लोमा इन म्यूजियोलॉजी
सीट– बीए और एमए दोनों में 25-25 सीटें निर्धारित हैं। हालांकि स्टूडेंट की संख्या के अनुसार इन्हें बढ़ाया जा सकता है।
कैसे होता है एडमिशन- प्रत्येक पाठयक्रम में प्रवेश मेरिट बेस पर होता है। बीए में हायर सेकंडरी और एमए में ग्रेजुएशन के अंक देखे जाते हैं। इनके आधार पर मेरिट बनती है।
यह है खास- ट्रेनिंग और थ्योरी
डिपार्टमेंट में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों होते हैं। स्टूडेंटस को एएसआई म्यूजियम, होटल सेवा से जुड़े संस्थानों, शोध संस्थानों की विजिट कराई जाती है। म्यूजियम के इंटीरियर डिजाइन, डिस्प्ले तकनीक, संरक्षण मानकों और म्यूजियम मैनेजमेंट का अध्ययन कराया जाता है।
जॉब की संभावना- इतिहास की पढ़ाई प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने में सहायक रहती है। स्टूडेंटस सहायक प्राध्यापक में भी करियर बना सकते हैं। संग्रहालय प्रोजेक्ट में सेवा देने वाले स्टूडेंटस को प्रशिक्षण के दौरान मानदेय मिलता है। बेहतरीन विद्यार्थियों को कई कंपनियां जॉब देती हैं।
लैब से मिलेगा रिसर्च को नया आयाम: सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत 3.5 करोड़ रुपए के अनुदान से प्रदेश की पहली आधुनिक पुरातत्व प्रयोगशाला विकसित की जा रही है। इसमें अत्याधुनिक उपकरण स्थापित हो चुके हैं।
विरासत को सहेज रहे हैं
इतिहास के साथ विरासत को सहेजने, विज्ञान और पर्यटन का व्यावहारिक प्रशिक्षण विभाग में दिया जा रहा है। फील्ड वर्क, प्रोजेक्ट और प्रैक्टिकल के माध्यम से स्टूडेंटस को करियर और रिसर्च से जोड़ा जा रहा है। इससे रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।
डॉ. विश्वजीत सिंह परमार, एचओडी, पुरात्त्व एवं इतिहास डिपार्टमेंट









