Popup Image
Advertisement

रेज्ड बोवनी पद्धति ने बदला तरीका , अब खेतों में नहीं रुक रहा पानी

कम-ज्यादा बारिश की स्थिति में सोयाबीन को बचाती है नुकसान से, कृषि विभाग के अफसरों ने देखा

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सोयाबीन फसल की बोवनी के लिए क्षेत्र में किसान रेज्ड बैड पद्धति अपना रहे हैं। समीपस्थ ग्राम नवाखेड़ा तथा निनोरा में किसानों ने करीब 125 बीघा रकबे में इस पद्धति से सोयाबीन की बोवनी की है। बोवनी के करीब एक माह बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने इन गांवों में खेतों का निरीक्षण किया तो फसल बेहतरीन मिली।

सहायक संचालक कृषि कमलेश राठौड़ ने बताया ग्राम नवाखेड़ा तथा निनोरा गए निरीक्षण दल में उनके अलावा संयुक्त संचालक कृषि आरपीएस नायक, परियोजना आत्मा संचालक केएस कैन, सहायक कृषि यंत्री पीसी सिसौदिया शामिल थे। राठौड़ ने बताया वर्षा रुकने के बावजूद खेत में नमी थी। इस कारण नुकसान की संभावना नहीं थी। निरीक्षण के दौरान ही बारिश शुरू हो गई और रेज्ड बैड की नालियों से अतिक्ति पानी आसानी से निकलता दिखा। कृषक राजेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 15 दिनों तक वर्षा नहीं हुई थी परंतु उनकी सोयाबीन फसल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।

Advertisement

सहायक संचालक के मुताबिक बदलती जलवायु परिस्थितियों के कारण फसल बुवाई की विधियों में परिवर्तन आवश्यक है। रेज्ड बैड पद्धति अधिक एवं कम वर्षा—दोनों परिस्थितियों में फसल को सुरक्षा देती है। इस तकनीक से सामान्य बुवाई की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन प्राप्त होने की संभावना रहती है।

क्या है रेज्ड बैड पद्धति
रेज्ड बैड प्लांटर मशीन से एक साथ मेड़ बनाने, खाद डालने और बीज की बोवनी का काम होता है। मशीन से बीज के नीचे खाद डाली जाती है। बीज को 3 से 4 सेमी गहरा बोया जाता है। इस विधि में लगभग 15 से 20 सेमी ऊंची मेड़ और उनके बीच 25 से 30 सेमी चौड़ी नालियां बनाई जाती हैं, जिन पर फसल की 2 से 3 कतारें बोई जाती हैं। रेज्ड बैड की ऊंचाई 15 से 20 सेंटीमीटर रहती है तथा दो मेड़ों के बीच 50 से 60 मीटर दूरी रहती है। प्रत्येक चौड़ी मेड़ पर दो से तीन कतार बनाई जाती है जिनकी दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रहती है।

Advertisement

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें