महाकाल के बेसन लड्डू प्रसाद का स्वाद बदला

अप्रशिक्षित कर्मचारी तैयार कर रहे हैं प्रसाद, मांग के मुताबिक पूर्ति भी नहीं हो रही
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर के लड्डू प्रसाद का स्वाद इन दिनों बदला हुआ है। अप्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा लड्डू तैयार करने और लड्डू सिकाई में घी की मात्रा कम होने के कारण स्वाद में बदलाव आया है। इन दिनों मंदिर में प्रसाद की डिमांड भी अधिक है।
भगवान श्री महाकालेश्वर का बेसन लड्डू प्रसाद देशभर में प्रसिद्ध है। दूर-दूर से यहां आने वाले लोग लड्डू प्रसाद जरूर लेते हैं। इन लड्डुओं का निर्माण मंदिर की चिंतामन स्थित लड्डू निर्माण इकाई में होता है। इन दिनों यहां तकरीबन 80 कर्मचारी लड्डू बनाने के काम में जुटे हैं।
अप्रैल महीने से यहां पर केएसएस कंपनी के ऐसे कर्मचारी लड्डू बना रहे हैं जिन्हें इस काम का बिल्कुल भी अनुभव नहीं है। इस कारण हर लड्डू के हर घान में अलग-अलग स्वाद मिल रहा है। जबकि जरूरत यहां एक ही रेसिपी के मुताबिक लड्डू तैयार करने की है। इसके पहले लड्डू बनाने का काम एक हलवाई ग्रुप को दिया हुआ था। ये ग्रुप बेसन की सिंकाई से लेकर उसे तैयार करने का काम करता था। फिर उसके लड्डू बनाना और पैकिंग का काम अन्य कर्मचारी करते थे।
घी की मात्रा बदली तो टेस्ट में भी अंतर
सूत्रों के मुताबिक महाकाल मंदिर के लड्डू पहले काफी खस्ता और दानेदार होते थे। जिसका कारण बेसन की एक-सी आंच पर लंबी सिंकाई और बेसन में शुद्ध घी की मात्रा का कांबिनेशन था। गर्मी के दिनों में बेसन सिंकाई में उपयोग किया गया देसी घी लड्डू छोड़ देते थे। जिसे देखकर अधिकारियों को लगा कि यह घी की बर्बादी है। इस कारण उन्होंने घी की मात्रा कम करवा दी। इससे स्वाद में भी अंदर आ गया। इसके बाद हलवाई ग्रुप को हटाकर निजी कंपनी के कर्मचारियों से लड्डू बनवाया जाने लगा।
दोपहर तक ही खत्म हो जाता है स्टॉक
इन दिनों दर्शनार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण लड्डू की भी डिमांड अधिक है। चिंतामण गणेश स्थित लड्डू निर्माण यूनिट पर दिन में 10 से 12 घंटे काम होता है और आम दिनों में रोज करीब 24 से 25 क्विंटल लड्डू का निर्माण होता है। सावन और विशेष दिनों मेें डिमांड बढ़कर 35 से 40 क्विंटल हो जाती है। ऐसे में अकसर ऐसा होता है कि दोपहर तक स्टॉक खत्म हो जाता है।









