आज सावन का आखिरी सोमवार, शाम को निकलेगी महाकाल की सवारी

महाकाल नंदी रथ पर निकलेंगे उमा महेश स्वरूप में
उज्जैन। सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को बाबा महाकाल के दरबार में लाखों की संख्या में दर्शनार्थी देश के कोने-कोने से आए हैं। लाखों श्रद्धालु तड़के से ही महाकाल मंदिर के बाहर लंबी कतारों में दिख रहे थे। बाबा महाकाल के दरबार को सोमवार को फूलों से सजाया गया। महाराष्ट्र के बीड़ के रहने वाले अर्जुन पिंगले ने शृंगार किया।
सोमवार को महाकाल मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह 11 बजे तक दो लाख से अधिक ने किए दर्शन
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को बाबा महाकाल के दरबार में लाखों की संख्या में दर्शनार्थी देश के कोने-कोने से आए हैं। लाखों श्रद्धालु तड़के से ही महाकाल मंदिर के बाहर लंबी कतारों में दिख रहे थे। अलसुबह भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।

परंपरा अनुसार प्रात: 2.30 बजे मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ खोले गए। पूजन-अर्चन के बाद बाबा महाकाल को राजाधिराज स्वरूप में सजाते हुए रजत चंद्र, त्रिपुण्ड, त्रिशूल और आभूषण अर्पित किए गए। भांग, चंदन, सूखे मेवों और पुष्पमालाओं के साथ भगवान को शेषनाग का चांदी का मुकुट और रजत मुंडमाला धारण कराई गई। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई, जिसके बाद भस्मार्ती हुई।

सोमवार सुबह दर्शनार्थियों की काफी भीड़ थी। सुबह 11 बजे तक करीब 2 लाख श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर चुके थे। मंदिर में भीड़ बरकरार है। शाम तक यह आंकड़ा 5 लाख से अधिक पहुंचने की संभावना है। रविवार को महाकाल मंदिर में 4 लाख 49 हजार लोगों ने दर्शन किए थे।
शाम को निकलेगी बाबा की भव्य सवारी
सावन के अंतिम सोमवार शाम 4 बजे बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर में पूजन के बाद श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप पालकी में सवार होकर निकलेंगे।
चार स्वरूप मेें दिखेंगे बाबा महाकाल : सावन के अंतिम सोमवार शाम 4 बजे बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर में पूजन के बाद श्री चंद्रमौलेश्वर स्वरूप पालकी में होंगे, गजराज पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव और नंदी रथ पर उमा-महेश विराजमान रहेंगे।
मेरा भोला है भंडारी..
गायक हंसराज रद्युवंशी भस्मार्ती में शामिल
इन कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां
सुंदरलाल मालवीय- मालवा लोक एवं भजन गायक ने ‘शंकर तेरी जटा से बहती है गंग धारा’ और ‘बाजे डम-डम-डम मेरे भोले का डमरू’ जैसे भजनों से कार्यक्रम की शुरुआत की।
किशन भगत- इन्होंने ‘बस इतनी कृपा करना’, ‘मैं भोले का दीवाना’ और ‘मुझको तो बस महाकाल बाबा चाहिए’ जैसे भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हंसराज रघुवंशी – अंतिम चरण में पहुंचे गायक हंसराज रघुवंशी ने मंच संभालते ही समां बांध दिया। उन्होंने ‘मेरा भोला है भंडारी’, ‘ओम नम: शिवाय’, ‘शिव समा रहे हैं मुझमें’ और ‘लागी मेरी तेरे संग’ जैसे प्रसिद्ध भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु झूम उठे।
उज्जैन। प्रसिद्ध भजन गायक हंसराज रघुवंशी सोमवार सुबह भस्मार्ती में शामिल हुए। नंदी हाल से उन्होंने आरती दर्शन किए। सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने उनका स्वागत किया। इसके पहले रविवार शाम को उन्होंने शक्ति पथ पर आयोजित शिवतत्व श्रावण कला महोत्सव में उन्होंने शिव भक्ति के भजनों का जादू बिखेरा।
सावन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में चल रहे विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के बीच रविवार शाम को ‘शिवतत्व श्रावण कला उत्सव’ हुआ जिसमें देश के जाने-माने कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से शक्तिपथ को पूरी तरह शिवमय कर दिया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति और मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग के समन्वय से यह कार्यक्रम प्रत्येक रविवार को हो रहा है। त्रिवेणी संग्रहालय के सामने स्थित शक्तिपथ पर आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत शाम 7 बजे मुख्य अतिथि संस्कृति विभाग की उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला, उप प्रशासक एस.एन. सोनी और सिम्मी यादव ने की। अतिथियों ने कलाकारों का सम्मान किया।









