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भूकंप आने से पहले अलर्ट देता है फोन, कहीं बंद तो नहीं सेटिंग?

वेनेजुएला में हाल ही में आए 7.1 और 7.5 तीव्रता के दो के बाद एक (बैक-टू-बैक) शक्तिशाली भूकंपों ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 32 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हैं।

 

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इस भीषण त्रासदी और दहशत के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक तकनीकी चमत्कार की खूब चर्चा हो रही है। कई प्रभावित यूजर्स ने स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दावा किया कि जमीन हिलने और झटके महसूस होने से कुछ सेकंड पहले ही उनके एंड्रॉएड स्मार्टफोन पर गूगल का ‘अर्थक्वेक अलर्ट’ (भूकंप चेतावनी) आ गया था, जिससे उन्हें संभलने का मौका मिल गया।

ऐसे में यह वैज्ञानिक कौतूहल पैदा होना लाजिमी है कि आखिर गूगल को सिस्मिक स्टेशनों (भूकंपीय केंद्रों) से पहले कैसे पता चल जाता है? क्या जेब में रखा साधारण सा मोबाइल वास्तव में भूकंप डिटेक्टर की तरह काम कर सकता है? आइए समझते हैं इसके पीछे का पूरा विज्ञान।

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स्मार्टफोन का ‘एक्सेलेरोमीटर’ सेंसर: आपके फोन में छिपा है मिनी सिस्मीग्राफ

आजकल बाजार में आने वाले लगभग हर एंड्रॉएड स्मार्टफोन में एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) नामक एक छोटा सा इन-बिल्ट सेंसर होता है।

सामान्य काम:
यह सेंसर आमतौर पर आपके फोन की मूवमेंट को ट्रैक करता है। जब आप फोन को आड़ा (लैंडस्केप) करते हैं तो स्क्रीन का ऑटो-रोटेशन इसी से नियंत्रित होता है। इसके अलावा गेमिंग और फिटनेस ऐप्स (कदम गिनने) में भी इसी का उपयोग होता है।

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भूकंपीय डिटेक्टर:
यह सेंसर बेहद संवेदनशील होता है। जब जमीन में कोई असामान्य कंपन या भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं, तो यह सेंसर उन्हें तुरंत भांप लेता है।

भीड़ की ताकत (Crowdsourcing): कैसे काम करता है गूगल का नेटवर्क?

सिर्फ एक फोन के कंपन से गूगल अलर्ट जारी नहीं करता। इसके पीछे ‘क्राउडसोर्सिंग’ और डेटा एनालिसिस का एक विशाल नेटवर्क काम करता है:

सिग्नल का प्रेषण:
जैसे ही किसी एंड्रॉएड फोन को भूकंप से मिलता-जुलता कोई कंपन महसूस होता है, वह तुरंत क्लाउड सर्वर को एक डिजिटल सिग्नल भेजता है, जिसमें उस फोन की अनुमानित लोकेशन (स्थान) शामिल होती है।

सेंसर डेटा का मिलान:
गूगल का केंद्रीय सर्वर एक ही समय पर हजारों-लाखों एंड्रॉएड डिवाइसेज से आ रहे इस डेटा का रियल-टाइम विश्लेषण करता है।

पुष्टि और अलर्ट:
यदि किसी एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में एक साथ बड़ी संख्या में फोन एक ही तरह का कंपन रिकॉर्ड करते हैं, तो कंप्यूटर एल्गोरिदम इसकी पुष्टि ‘भूकंप’ के रूप में कर देता है और बिना समय गंवाए प्रभावित क्षेत्र के अन्य लोगों को चेतावनी भेज दी जाती है।

वर्तमान में दुनिया भर में 20 अरब से अधिक एंड्रॉएड डिवाइस इस नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा डिस्ट्रीब्यूटेड अर्थक्वेक डिटेक्शन नेटवर्क बनाता है।

गति की जंग: भूकंप की विनाशकारी लहरों से तेज भागता है इंटरनेट

गूगल का यह पूरा सिस्टम भौतिक विज्ञान (Physics) के एक बेहद साधारण नियम और तरंगों की गति के अंतर पर काम करता है। भूकंप के दौरान मुख्य रूप से दो तरह की तरंगें (Seismic Waves) निकलती हैं:

पी-वेव्स (Primary Waves):
ये तरंगें सबसे पहले निकलती हैं और बेहद तेज गति (लगभग 6 किमी प्रति सेकंड) से चलती हैं। इनसे कोई बड़ा नुकसान नहीं होता, यह सिर्फ एक हल्का सा शुरुआती झटका देती हैं।

एस-वेव्स (Secondary Waves):
ये तरंगें पी-वेव्स के पीछे थोड़ी धीमी गति (3-4 किमी प्रति सेकंड) से चलती हैं। लेकिन ये बेहद विनाशकारी होती हैं और इमारतों को गिराने व तबाही मचाने के लिए यही जिम्मेदार होती हैं।

दूरी और चेतावनी का गणित

जब भूकंप आता है, तो स्मार्टफोन का एक्सेलेरोमीटर सेंसर सबसे पहले पहुंचने वाली हल्की पी-वेव्स को तुरंत पकड़ लेता है और सर्वर को सिग्नल भेजता है। इसके बाद असली खेल शुरू होता है इंटरनेट की स्पीड का।

इंटरनेट का सिग्नल ‘लाइट की स्पीड’ यानी लगभग 3,00,000 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से दौड़ता है, जो विनाशकारी एस-वेव्स की गति से लाखों गुना तेज है।

इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं:

यह कीमती 1 मिनट या कुछ सेकंड का समय किसी भी इंसान को टेबल के नीचे छिपने (Drop, Cover, Hold-on) या बहुमंजिला इमारतों से सुरक्षित बाहर खुले मैदान में भागने के लिए पर्याप्त होता है।

एंड्रॉएड में मिलने वाले अलर्ट के दो स्तर (Alert Levels)

1. बी अवेयर अलर्ट (Be Aware Alert):
यह हल्के झटकों की स्थिति में आता है। इसमें स्क्रीन पर एक सामान्य पॉप-अप आता है और फोन सिर्फ वाइब्रेट होता है, ताकि आप सतर्क हो जाएं। यह मुख्य रूप से 3 से 4.5 तीव्रता के भूकंपों के लिए होता है।

2. टेक एक्शन अलर्ट (Take Action Alert):
यह 4.5 या उससे अधिक तीव्रता के खतरनाक झटकों के लिए होता है। इसमें फोन साइलेंट या डू-नॉट-डिस्टर्ब (DND) मोड पर होने के बावजूद फुल वॉल्यूम में तेज सायरन बजाने लगता है। स्क्रीन बड़ी हो जाती है और सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिखाई देते हैं।

भारत में भी लाइव है यह फीचर; ऐसे करें अपने फोन में एक्टिवेट

गूगल ने साल 2023 में ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से इस सेवा को भारत में पूरी तरह लाइव कर दिया था। इस जीवन रक्षक सुविधा का लाभ उठाने के लिए आपके फोन में कुछ सेटिंग्स का ऑन होना जरूरी है।

1. फोन की मुख्य सेटिंग्स खोलें

स्टेप 1.
अपने एंड्रॉएड स्मार्टफोन (Android 5.0 या उससे ऊपर) के मुख्य Settings (सेटिंग्स) मेनू में जाएं।

2. सेफ्टी या लोकेशन विकल्प चुनें

स्टेप 2.
नीचे स्क्रॉल करें और Safety & Emergency (सेफ्टी एंड इमरजेंसी) पर टैप करें। यदि आपके फोन में यह विकल्प सीधा नहीं दिख रहा है, तो Location (लोकेशन) या Advanced Settings के विकल्प पर जाएं।

3. अर्थक्वेक अलर्ट पर क्लिक करें

स्टेप 3.
वहां आपको Earthquake Alerts (भूकंप अलर्ट) का एक विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।

4. फीचर को ऑन (चालू) करें

स्टेप 4.
यदि यह बटन बंद (Off) है, तो इसे दबाकर On (चालू) कर दें। ध्यान रखें कि इस फीचर के सही ढंग से काम करने के लिए आपके फोन का इंटरनेट (मोबाइल डेटा या वाई-फाई) और लोकेशन सर्विसेज हमेशा ऑन रहनी चाहिए।

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