अपरा एकादशी पर क्या करें और क्या न करें?

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष अपरा एकादशी का व्रत 13 मई बुधवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों का नाश होता है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से ही शुरू हो जाते हैं। ऐसे में व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक माना गया है।
क्या न करें
दशमी तिथि से ही तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
एकादशी के दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
तुलसी के पत्ते एकादशी और द्वादशी तिथि पर नहीं तोडऩे चाहिए। पूजा के लिए तुलसी दल पहले से रख लें।
व्रती को इस दिन नाखून और बाल नहीं काटने चाहिए।
दोपहर में सोना और संभव हो तो बिस्तर पर शयन करना भी वर्जित माना गया है।
नमक का सेवन नहीं करना चाहिए, इससे व्रत भंग माना जाता है।
झूठ, क्रोध, बुराई और लालच जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना चाहिए।
दूध और दही का सेवन भी कई मान्यताओं में वर्जित बताया गया है।
किसी जरूरतमंद को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
क्या करें
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
दशमी तिथि से ही सात्विक भोजन करना शुरू कर दें।
भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप पूरे श्रद्धाभाव से करें।
जरूरतमंदों को अन्न, जल और वस्त्र आदि का दान करें।
रात्रि में भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन या मानसिक जाप करना शुभ माना गया है।
व्रत के दौरान मन को शांत रखें और धार्मिक कार्यों में समय बिताएं।
द्वादशी तिथि पर विधि-विधान से पूजा करने के बाद ही व्रत का पारण करें।
पारण के समय तुलसी दल का उपयोग करना शुभ माना गया है।
धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।
अपरा एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं बल्कि संयम, श्रद्धा और नियमों के पालन का पर्व माना जाता है। शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।









