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इबोला को लेकर दुनिया में अलर्ट! भारत भी सतर्क, जानें कितना है संक्रमण का खतरा

दुनिया के कई देशों में इबोला वायरस को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है। इसी क्रम में भारत ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रवेश बिंदुओं, एयरपोर्ट्स और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रभावित देशों की गैरजरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई है।

 

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आखिर क्यों बढ़ी चिंता?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला वायरस का एक वेरिएंट तेजी से फैल रहा है, जिसके चलते कई देशों में संक्रमण के मामले बढ़े हैं। हाल के दिनों में बड़ी संख्या में संक्रमित मरीज सामने आए हैं और कई मौतों की भी खबरें मिली हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां इसे गंभीरता से ले रही हैं।

किन देशों में ज्यादा मामले सामने आए?

अफ्रीका के कई देशों में इबोला संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें कांगो, अंगोला, बुरुंडी, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, इथियोपिया, केन्या, रवांडा, दक्षिण सूडान, तंजानिया और जांबिया जैसे देश शामिल बताए जा रहे हैं।

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भारत ने क्या कदम उठाए?

सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में प्रभावित क्षेत्रों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा एयरपोर्ट और अन्य एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध यात्रियों की जांच करने और अज्ञात बुखार वाले मामलों की पहचान व रिपोर्टिंग पर विशेष जोर दिया गया है।

स्वास्थ्य विभागों को भी सतर्क रहने और संक्रमण संबंधी हर गतिविधि पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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क्या भारत में मिला है कोई मामला?

फिलहाल देश में इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। हालांकि संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी और तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है।

कितना खतरनाक है इबोला वायरस?

इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जिसे दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है। यह इंसानों के साथ कुछ जंगली जानवरों को भी प्रभावित कर सकता है। संक्रमण गंभीर होने पर शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं और जान का खतरा भी बढ़ जाता है।

कैसे फैलता है संक्रमण?

इबोला वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इनमें खून, लार, पसीना, उल्टी, पेशाब और अन्य शारीरिक द्रव शामिल हैं।

इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर, मेडिकल उपकरण या अन्य दूषित वस्तुओं के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है। संक्रमित जंगली जानवरों के संपर्क को भी जोखिमपूर्ण माना जाता है।

क्या हवा से फैलता है इबोला?

विशेषज्ञों के अनुसार इबोला सामान्य तौर पर हवा के जरिए नहीं फैलता। इसका संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या उसकी वस्तुओं के सीधे संपर्क से होता है।

शुरुआती लक्षण क्या हैं?

इबोला के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं। इनमें तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त और अत्यधिक थकान शामिल हो सकती है।

इसी कारण शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

क्या इसका इलाज उपलब्ध है?

मौजूदा समय में फैल रहे वेरिएंट के लिए विशेष इलाज और वैक्सीन को लेकर सीमित विकल्प मौजूद हैं। इसलिए संक्रमण से बचाव और समय पर पहचान सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले लोग, स्वास्थ्यकर्मी, प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग और संक्रमित व्यक्तियों के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक माना जाता है।

विदेश यात्रा करने वालों के लिए जरूरी सलाह

अगर किसी प्रभावित क्षेत्र की यात्रा जरूरी हो तो वहां के स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करें। बीमार व्यक्तियों और जंगली जानवरों के संपर्क से बचें। हाथों की नियमित सफाई करें और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण को हल्के में न लें।

भारत में रहने वालों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। विदेश यात्रा से लौटे लोगों में यदि बुखार, कमजोरी, उल्टी या अन्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

मास्क और सैनिटाइजर कितने असरदार?

हाथों की नियमित सफाई संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद करती है। सैनिटाइजर वायरस लगे हाथों को साफ रखने में उपयोगी हो सकता है। वहीं मास्क संक्रमित तरल पदार्थों के संपर्क का जोखिम घटाने में सहायक माना जाता है।

हालांकि केवल मास्क पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संक्रमण से बचाव के लिए अन्य सावधानियों का पालन भी जरूरी है।

प्रभावित देशों से लौटे लोग क्या करें?

यदि कोई व्यक्ति हाल ही में प्रभावित क्षेत्र से लौटा है तो उसे अगले 21 दिनों तक अपनी सेहत पर विशेष नजर रखनी चाहिए। बुखार, उल्टी, कमजोरी या दस्त जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी यात्रा की जानकारी स्वास्थ्यकर्मियों को जरूर दें।

समय पर पहचान, सतर्कता और सही सावधानियां ही इबोला जैसे खतरनाक संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती हैं।

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