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उज्जैन:कोटवाणी परिवार से मिलने जाने के कार्यक्रम ने चौंकाया भाजपाईयों को

नई पीढ़ी को नहीं पता रामजी कोटवाणी के राजमाता से पारिवारिक संबंधों का

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उज्जैन। जब जनसंघ का जमाना था तो राजमाता विजयाराजे सिंधिया का मालवा में आगमन होने पर रामजी कोटवाणी के निवास पर जाकर उनसे भेंट करना और क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों को समझना, ऐसा अक्सर होता था। यह राजनीनितिक विमर्श कहीं न कहीं जनसंघ को उज्जैन जिले में भी गढ़ के रूप में स्थापित करने में मददगार रहा।
इन्ही संबंधों को माधवराव सिंधिया ने कायम रखा और उनका उज्जैन न आने पर भी कोटवाणी परिवार से संपर्क बराबर बना रहा। ग्वालियर से भी इस परिवार की कुशल क्षेम पूछी जाती रही। दो पीढिय़ों के इन संबंधों को तीसरी पीढ़ी के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कायम रखेंगे,यह संदेश उन्होने अपने उज्जैन प्रवास के कार्यक्रम में कोटवाणी परिवार के निवास पर जाकर मिलने के रूप में दिए हैं। सोमवार को उज्जैन प्रवास के दौरान वे रामजी कोटवाणी के बड़े पुत्र शिवा के निवास पर जाएंगे। यहां उनका स्वागत अशोक कोटवाणी भी करेंगे।

चर्चा में अशोक कोटवाणी ने बताया कि राजमाता सिंधिया उनके निवास पर आती रहीं। पिताजी के साथ राजनीतिक विमर्श करती थीं। पिताजी ने जनसंघ को स्थापित करने में रीढ़ के रूप में काम किया। यही कारण है कि तत्कालीन समय में माधवरावजी ने भी परिवार से संबंध कायम रखे और संवाद करते रहे। इसी का परिणाम है कि तीसरी पीढ़ी के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी उनके परिवार को महत्व दिया।

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उज्जैन दक्षिण की राजनीति लेगी करवट: भाजपा की राजनीति को उज्जैन दक्षिण की दृष्टि से देखें तो ऐसे अनेक अवसर आए जब शिवा कोटवाणी एवं उनके छोटे भाई की पत्नि रजनी कोटवाणी के बीच वैचारिक मतभेद उभरे। कहीं न कहीं टिकट की दौड़ में दोनों परिवारों के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से देखने को मिले। कोरोना महामारी ने भले ही कितने ही परिवारों को तोड़ दिया लेकिन कोटवाणी परिवार को जोड़ दिया। लॉकडाउन की अवधि में दोनों परिवारों का साथ उठना-बैठना और नाश्ता/भोजन का सिलसिला चलता रहा,जो अब पूर्ववत स्थायी रूप से चुका है। चर्चा में अशोक कोटवाणी ने बताया कि अब कोई राजनीतिक/वैचारिक मतभेद नहीं है।

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