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गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव पर भारत का कड़ा ऐतराज, बोला- वोटिंग से नहीं छिपेगा पाकिस्तान का अवैध कब्जा

पाकिस्तान के नियंत्रण वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में एक बार फिर चुनावी माहौल बन चुका है। इस क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से अलग रही है। जहां PoK का अपना संविधान, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधानसभा है, वहीं गिलगित-बाल्टिस्तान को लंबे समय तक सीधे पाकिस्तान की संघीय सरकार के माध्यम से संचालित किया जाता रहा। वर्ष 2009 में पहली बार यहां विधानसभा चुनाव कराए गए थे। इसके बाद 2018 में नए प्रशासनिक आदेश के जरिए स्थानीय सरकार और विधानसभा को अधिक अधिकार दिए गए। अब इसी व्यवस्था के तहत दूसरा चुनाव आयोजित किया जा रहा है।

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PoK में 27 जुलाई को डाले जाएंगे वोट

गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भी चुनावी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनाव में कुल 53 सीटों के लिए राजनीतिक दल मैदान में उतरेंगे। इनमें 45 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव होगा, जबकि आठ सीटें महिलाओं, धार्मिक विद्वानों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए आरक्षित हैं। यहां विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है।

PTI की सरकार से लेकर राजनीतिक उथल-पुथल तक

साल 2021 के चुनाव में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने, लेकिन पाकिस्तान में राजनीतिक बदलावों का असर जल्द ही PoK पर भी दिखाई दिया। 2022 में उनके इस्तीफे के बाद सरदार तनवीर इलियास को जिम्मेदारी मिली, लेकिन अदालत द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के बाद उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने बाद में PTI से दूरी बना ली और अन्य दलों के समर्थन से सरकार चलाते रहे।

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महंगाई और बिजली संकट ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें

पिछले कुछ वर्षों में PoK में महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और आटे की कीमतों को लेकर जनता में भारी नाराजगी देखने को मिली। वर्ष 2024 में कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। हालात को संभालने के लिए पाकिस्तान की संघीय सरकार को आर्थिक राहत पैकेज और सब्सिडी की घोषणा करनी पड़ी थी।

भारत का दावा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 24 सीटें

भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, उसका अभिन्न हिस्सा है। 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद हुए परिसीमन के तहत विधानसभा में 24 सीटें इन क्षेत्रों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। चूंकि ये क्षेत्र फिलहाल पाकिस्तान के नियंत्रण में हैं, इसलिए इन सीटों पर चुनाव नहीं कराए जाते और इन्हें खाली रखा जाता है।

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चुनावों पर टिकी हैं क्षेत्रीय राजनीति की नजरें

गिलगित-बाल्टिस्तान और PoK में होने वाले चुनाव केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में इन दोनों क्षेत्रों के चुनावी नतीजों पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

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