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बार-बार खांसी-जुकाम और थकान? शरीर में हो सकती है ये कमी

जब भी खांसी, जुकाम या गले की तकलीफ होती है तो हम फौरन ठंडी हवा, बारिश या प्रदूषण को दोष दे देते हैं। लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में असली मुजरिम मौसम नहीं बल्कि हमारी खुद की रोजाना की आदतें होती हैं जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देती हैं। रात को देर तक जागना, खाना छोड़ देना, घंटों स्क्रीन देखते रहना और तनाव में जीना अब इतना आम हो गया है कि लोग इसे सामान्य जिंदगी का हिस्सा मान चुके हैं। शरीर कुछ दिन यह सब सहता रहता है लेकिन आखिरकार रोग प्रतिरोधक क्षमता पर इसका असर पड़ने लगता है और फिर बार-बार बीमार पड़ने का सिलसिला शुरू हो जाता है।

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नींद से समझौता सबसे महंगा पड़ता है

अपोलो हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रशीका के अनुसार नींद का मतलब सिर्फ घंटे गिनना नहीं है, उसकी गुणवत्ता भी उतनी ही मायने रखती है। जो लोग रात में बार-बार जागते हैं, खर्राटे लेते हैं या सोने से पहले लंबे समय तक फोन चलाते हैं उनका शरीर खुद को ठीक करने का काम ठीक से नहीं कर पाता। ऐसे में बार-बार सर्दी, खांसी और सांस से जुड़ी तकलीफें घेर लेती हैं।

कमजोर इम्युनिटी के नुकसान

अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था CDC की एक शोध रिपोर्ट बताती है कि नींद पूरी न होने का असर सिर्फ थकान तक नहीं रुकता। दिल की बीमारी, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। गहरी नींद के दौरान शरीर में ऐसे प्रोटीन बनते हैं जो संक्रमण से लड़ते हैं और टूटे-फूटे हिस्सों की मरम्मत होती है।

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खानपान की गड़बड़ी भी कम जिम्मेदार नहीं

डॉ. रशीका यह भी मानती हैं कि आजकल लोगों की थाली से जरूरी पोषक तत्व गायब होते जा रहे हैं। लोग या तो खाना छोड़ देते हैं या फिर पैकेटबंद खाने, मीठे नाश्ते और झटपट तैयार होने वाले भोजन पर निर्भर हो जाते हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने के लिए प्रोटीन, आयरन, जिंक, विटामिन, फाइबर और पर्याप्त पानी सभी जरूरी हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ की एक स्टडी भी यही कहती है कि खानपान का सीधा असर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सूजन के स्तर पर पड़ता है।

पानी कम पीना और बंद कमरों में रहना भी है खतरनाक

डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग दिन भर पर्याप्त पानी नहीं पीते उनके शरीर में म्यूकस गाढ़ा हो जाता है जिससे संक्रमण का रास्ता आसान हो जाता है। इसके अलावा एसी कमरों, धूल भरे और भीड़भाड़ वाले बंद स्थानों में लंबे समय तक रहने से वायरस और एलर्जी फैलाने वाले तत्व हवा में बने रहते हैं और आसानी से बीमार कर सकते हैं। घर हो या दफ्तर, खराब हवा और बंद माहौल दोनों ही सेहत के दुश्मन हैं।

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