यूनेस्को की रेस में पिछड़ी इंदौर की गेर… इतिहास साबित करने में नाकाम रहे जिम्मेदार

अक्षरविश्व न्यूज इंदौर। इंदौर की विश्वप्रसिद्ध रंगपंचमी गेर को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने का सपना इस बार भी अधूरा रह सकता है। दिल्ली स्थित संस्कृति मंत्रालय को भेजी गई जानकारी अधूरी होने के कारण गेर को वैश्विक धरोहर का दर्जा मिलने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
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प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के तमाम दावों के बावजूद, जमीनी स्तर पर ऐतिहासिक सबूतों की कमी इंदौर के दावे को कमजोर कर रही है। यूनेस्को की गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी परंपरा या त्योहार को विश्व धरोहर सूची में तभी जगह मिलती है जब उसका इतिहास बहुत पुराना और निरंतर हो। नियमानुसार, इसके लिए कम से कम 100 साल पुराने साक्ष्य देने होते हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा और सांसद शंकर लालवानी की टीम ने जो रिकॉर्ड दिल्ली भेजा है, उसमें केवल पिछले 30-40 साल का ही ब्यौरा है। गेर को शताब्दी पुरानी परंपरा साबित करने वाले ठोस दस्तावेज और ऐतिहासिक फोटोग्राफ्स जुटाने में अधिकारी अब तक विफल रहे हैं।
यूनेस्को ने दुनिया की जिन खास परंपराओं को अपनी सूची में शामिल किया है, उनमें स्पेन का मशहूर टोमेटिना फेस्टिवल, बनारस की गंगा आरती और पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा शामिल हैं। इंदौर की गेर में भी लाखों की भीड़ और सद्भाव का वही अद्भुत संगम दिखता है, लेकिन दस्तावेजों की कमी इसे वैश्विक पहचान दिलाने से रोक रही है।
रंगपंचमी में अब महज एक हफ्ता बचा है। नियम यह है कि संस्कृति मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद यूनेस्को की टीम खुद इंदौर आकर गेर का निरीक्षण करती है। लेकिन अब तक मंत्रालय की ओर से ऐसी कोई पहल नहीं की गई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्वीकार किया कि इस साल केंद्र की टीम आने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन नगर निगम अपनी तैयारी पूरी रखेगा।
भले ही इस साल यूनेस्को का तमगा मिलना मुश्किल लग रहा हो, लेकिन शहर के उत्साह में कोई कमी नहीं है। प्रशासन अब पुराने राजघराने और इतिहासकारों की मदद से गेर के प्राचीन सबूत खोजने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में इस गौरवशाली परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका हक मिल सके।
नेताओं के दावे: अभी हार नहीं मानी
सांसद शंकर लालवानी: हमने संस्कृति मंत्रालय से दोबारा बात की है। विदेशी मेहमानों की तस्वीरें और गेर की भव्यता के नए प्रमाण भेजे गए हैं। उम्मीद है कि एक-दो दिन में कोई सकारात्मक खबर मिले।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव: इस साल हम नगर निगम की पारंपरिक गेर को और भी बेहतर और अनुशासित बनाएंगे, ताकि अगले साल के लिए हमारा दावा और मजबूत हो सके।
कलेक्टर कार्यालय: मप्र संस्कृति विभाग के जरिए दिल्ली भेजी गई रिपोर्ट में 30-40 साल का रिकॉर्ड और वर्तमान की भव्यता का पूरा विवरण दिया गया है।









