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पूर्व जज काटजू ने बनाई ‘इश्क करो पार्टी’, बोले- प्यार बढ़ाओ, नफरत और लड़ाई नहीं

देश की राजनीति और सामाजिक माध्यमों पर अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई कानूनी टिप्पणी नहीं, बल्कि उनकी नई राजनीतिक पहल है। काटजू ने “इश्क करो पार्टी” नाम से एक नए संगठन की घोषणा की है। उन्होंने युवाओं से इस पार्टी से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य “प्यार करो, युद्ध नहीं” का संदेश फैलाना है। उनके इस एलान के बाद सामाजिक माध्यमों पर बहस, मजाक और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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इश्क करो पार्टी की चर्चा क्यों हो रही है?

मार्कंडेय काटजू ने सामाजिक माध्यम मंच “एक्स” पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि जो लोग इश्क करो पार्टी से जुड़ना चाहते हैं, वे ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने स्वयं को इस पार्टी का संरक्षक बताया। काटजू के अनुसार यह पार्टी नफरत और टकराव की राजनीति के विरुद्ध प्रेम, भाईचारे और मानवीय संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है। अभी तक पार्टी का कोई औपचारिक घोषणा-पत्र जारी नहीं किया गया है, लेकिन “प्यार करो, युद्ध नहीं” को इसका प्रमुख संदेश बताया जा रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी से तुलना क्यों हो रही है?

काटजू की नई पार्टी की तुलना सामाजिक माध्यमों पर कॉकरोच जनता पार्टी से की जा रही है। हाल ही में यह संगठन तब चर्चा में आया था, जब उसने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। संगठन ने कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। सामाजिक माध्यमों पर बड़ी संख्या में समर्थक होने के बावजूद प्रदर्शन में सीमित लोग पहुंचे थे। अब इश्क करो पार्टी की घोषणा के बाद कई लोग इसे कॉकरोच जनता पार्टी का नया प्रतिद्वंद्वी बता रहे हैं। इतना ही नहीं, काटजू ने एक संदेश में युवाओं से कॉकरोच वाली बातों को भूलकर इश्क करो पार्टी से जुड़ने की अपील भी की।

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क्या सामाजिक माध्यमों तक ही सीमित है यह नई पार्टी?

फिलहाल इश्क करो पार्टी केवल सामाजिक माध्यमों और ऑनलाइन चर्चाओं तक ही सीमित दिखाई दे रही है। पार्टी का कोई आधिकारिक ढांचा, संगठनात्मक टीम या चुनावी योजना अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, काटजू ने संकेत दिए हैं कि पार्टी की वेबसाइट और सामाजिक माध्यम खाते तैयार किए जा रहे हैं। एक वायरल संदेश में उन्होंने लेखिका और पत्रकार मृणाल पांडे को भी इस पार्टी से जुड़ने का निमंत्रण दिया। इसके बाद सामाजिक माध्यमों पर प्रतिक्रियाओं और व्यंग्यात्मक संदेशों की बाढ़ आ गई।

सामाजिक माध्यमों पर कैसी रही लोगों की प्रतिक्रिया?

मार्कंडेय काटजू की इस घोषणा के बाद सामाजिक माध्यमों पर लोगों की राय बंटी हुई नजर आई। कुछ लोगों ने इसे मौजूदा तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल में एक सकारात्मक और हल्का-फुल्का संदेश बताया। वहीं कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह पार्टी वास्तव में राजनीति में सक्रिय होगी या केवल सामाजिक माध्यमों तक सीमित रहेगी। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या एकतरफा प्रेम करने वाले भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। वहीं कई लोग पार्टी का घोषणा-पत्र जारी करने की मांग करते नजर आए।

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कौन हैं मार्कंडेय काटजू?

मार्कंडेय काटजू भारत के पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश हैं। वह वर्ष 2006 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने थे और सितंबर 2011 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के कारण वह अक्सर चर्चा में रहते हैं। उनके पिता एस. एन. काटजू इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके हैं।

न्यायपालिका से सार्वजनिक जीवन तक का सफर

मार्कंडेय काटजू ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विधि की पढ़ाई की और अपने बैच में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से वकालत की शुरुआत की और बाद में न्यायपालिका में लगातार आगे बढ़ते गए। वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने, फिर मद्रास उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे। इसके बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर लगातार अपनी राय रखते रहे हैं।

क्या यह मजाक है या गंभीर राजनीतिक संदेश?

कई लोग इस पहल को व्यंग्य और हास्य के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इसके माध्यम से काटजू वर्तमान राजनीति पर टिप्पणी करना चाहते हैं। इश्क करो पार्टी का नाम और उसका संदेश सीधे तौर पर नफरत, टकराव और राजनीतिक ध्रुवीकरण के विरोध में दिखाई देता है। यही कारण है कि इस घोषणा ने राजनीति से अधिक सामाजिक माध्यमों और युवाओं के बीच चर्चा पैदा की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल आगे चलकर किसी बड़े अभियान का रूप लेती है या नहीं।

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