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उज्जैन के अधिकांश स्कूल अब सोमवार से ही खुलेंगे..!

बसें अधिग्रहित, स्कूलों में मतदान केंद्र बनने से अवकाश जैसी स्थिति

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अक्षरविश्व न्यूज . उज्जैन:मतदान दलों के लिए बसों का अधिग्रहण की गई है। यात्रियों सुविधा को देखते हुए इस बार स्कूल-कॉलेज की अधिक बसों को ही इसमें शामिल किया है। इसके चलते बस से आने वाले बच्चे स्कूल नहीं पहुंच सकेंगे। दूसरी ओर कई स्कूलों में मतदान केंद्र बनाए जाने के कारण भी वहां छुट्टी जैसा माहौल रहेगा। ऐसे में अब अधिकांश स्कूल अगले सप्ताह सोमवार 20 नवंबर से ही खुलेंगे।

दरअसल, परिवहन विभाग ने विधानसभा चुनाव के लिए इस बार यात्री बसों को कम ही अधिग्रहित नहीं किया गया है। जिले में बसों की पूर्ति स्कूल और कॉलेज की बसों से होगी। स्कूल बसों का अधिग्रहण होने से ज्यादातर स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। वह स्कूल अब सोमवार से ही खुलेंगे। बसों का अधिग्रहण होने से कुछ स्कूल प्रबंधकों ने परिजनों को खुद के वाहनों से बच्चों को स्कूल छोडऩे के लिए भी मैसेज किया है। वहीं कुछ स्कूलों में अभी दिवाली की छुट्टियां चल रही है। इसके बाद बच्चों को अपने वाहनों से ही पहुंचना होगा।

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स्कूलों को बनाया गया है मतदान केंद्र

मतदान के लिए जिले के प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को भी मतदान केंद्र बनाया गया है इस वजह से भी स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है, क्योंकि 16 तारीख को शाम तक पोलिंग पार्टियों के मतदान केंद्रों में पहुंचना शुरू हो गई है।

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अस्थमा के अटैक से महिला अफसर बेहोश, अस्पताल में भर्ती

कॉलेज कैंपस में उस वक्त एक महिला बेहोश हो गई जब सामग्री वितरण के दौरान बडऩगर के मतदान दल में शामिल हाटकेश्वरधाम कॉलोनी की रंजीता डोंगरे बेहोश हो गई। उनको तत्काल सिविल हॉस्पिटल भेजा गया। डॉक्टरों ने बताया डोंगरे को अस्थमा का अटैक आया था।

कुछ जगह मतदान सामग्री वितरण व्यवस्था गड़बड़ाने से भी दलों को परेशानियां आईं। इस कारण सुबह 11 बजे तक एक भी दल अपने क्षेत्र की ओर रवाना नहीं हो सका था। बाद में करीब साढ़े ग्यारह बजे पहला दल रवाना हो सका। हालांकि दल के प्रमुख को जिस स्थान से सामग्री लेना थी, वहां एक पर्ची भी मिली, जिस पर लिखा था उनको सामग्री कहां से लेना है।

हाथ में फ्रेक्चर फिर भी लग गई ड्यूटी: मतदान के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी अनिवार्य की गई है। कई ने जुगाड़ लगाकर अपनी ड्यूटी कैंसिल करा ली। इसका नतीजा यह हुआ की खानापूर्ति के लिए ऐसे सेवकों की भी ड्यूटी लग गई, जिनके हाथ में फैक्चर है। कॉलेज कैंपस में एक सेवक हाथ में पट्टा बंधाए ही ड्यूटी पर पहुंचे।

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