कालभैरव के शीघ्रदर्शन 500 रु. में, गर्भगृह भी जा सकेंगे लेकिन मदिरा भोग की अनुमति नहीं

सामान्य दर्शनार्थी पहले की तरह बाहर से कतार में दर्शन करेंगे, सुबह 6 बजे से नई व्यवस्था लागू
अक्षरविश्व न्यूजउज्जैन। श्री कालभैरव मंदिर में बुधवार से 500 रुपए में शीघ्र दर्शन की नई व्यवस्था लागू हो गई है। 500 रुपए देकर दर्शनार्थी गर्भगृह में जाकर भगवान कालभैरव के दर्शन कर सकेंगे लेकिन उन्हें मदिरा भोग की अनुमति नहीं रहेगी।
सुबह 6 बजे से शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत पहले ही दिन कई लोगों ने दर्शन लाभ लिया। सुबह 11.30 बजे तक 20 रसीदें बनाई गई और 55 लोग शीघ्र दर्शन का लाभ लेकर दर्शन कर चुके थे। हालांकि, कई दर्शनार्थी इसके विरोध में भी देखे गए। वर्तमान में मंदिर के पट सुबह 6 बजे से रात 9.30 बजे तक खुलते हैं। सुबह 8 और रात 8.30 बजे आरती के समय दर्शन कुछ देर के लिए बंद रहते हैं। बाकी समय सामान्य दिनों में सभी श्रद्धालुओं को कतार में लगाकर ही दर्शन करवाए जाते हैं।
साथ ही प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार वीआईपी दर्शनार्थियों के लिए अलग से इंतजाम रहते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी आम जनता के लिए कतार वाली सामान्य दर्शन व्यवस्था पहले की तरह ही पूरी तरह यथावत जारी रहेगी। बदलाव केवल शीघ्रदर्शन के लिए होगा जिसके तहत मंदिर परिसर में रसीद काउंटर बनाया जाएगा। यहां से 500 रुपए की रसीद लेने वाले श्रद्धालुओं को सीधे गर्भगृह से दर्शन करने की विशेष सुविधा मिल सकेगी।
125 करोड़ रुपए से कालभैरव परिसर को संवारने की योजना
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए शासन ने महाकाल मंदिर की तरह ही श्री कालभैरव मंदिर क्षेत्र में 125.17 करोड़ रुपये की लागत से कॉरिडोर निर्माण किया जा रहा है। दर्शनार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कॉरिडोर के निर्माण का जिम्मा उज्जैन विकास प्राधिकरण को सौंपा गया है।
सीधी बात : दर्शनार्थियों को सुविधा और अवैध वसूली रोकने के लिए लगाया शुल्क
Q. शीघ्रदर्शन के 500 रुपए मेें क्या सुविधा मिलेगी दर्शनार्थी को?
A. गर्भगृह में जाकर विशेष दर्शन की सुविधा मिलेगी। कतार में नहीं लगना पड़ेगा।
Q. शुल्क देकर गर्भगृह में जाने वाले मदिरा भोग लगा सकेंगे?
A. नहीं, मदिरा भोग अब सिर्फ तय समय पर पुजारी ही अर्पित करते हैं।
Q. इससे आम श्रद्धालुओं के दर्शन प्रभावित तो नहीं होंगे?
A. नहीं, आम श्रद्धालुओं के दर्शन पहले की तरह होंगे
Q. सशुल्क दर्शन व्यवस्था की आवश्यकता क्यों हुई?
A. लंबे समय से शिकायतें आ रही थीं कि कुछ अवांछित लोग रुपए लेकर लोगों को दर्शन करवाने के नाम पर ठगते हैं। ऐसे में मंदिर ने ही सशुल्क व्यवस्था लागू की ताकि रुपए देकर सुविधापूर्ण दर्शन की इच्छा रखने वालों को मौका मिले और मंदिर समिति की आय भी बढ़े।
Q. शुल्क 500 क्यों, महाकाल मंदिर में भी २५० रुपए लगते हैं?
A. कालभैरव मंदिर प्रांगण महाकाल मंदिर से काफी छोटा है। अव्यवस्था नहीं हो इसलिए शुल्क ज्यादा रखा। कम शुल्क में ज्यादा लोग दर्शन के लिए आते तो दर्शन कराने में असुविधा होती। अगर जनप्रतिक्रिया आई तो कुछ कम करने पर विचार करेंगे।
Q. प्रोटोकाल से आए दर्शनार्थी को शुल्क देना होगा?
A. -प्रशासनिक अतिथि, न्याय विभाग या अन्य अतिथि जिन्हें महाकाल मंदिर में नि:शुल्क दर्शन की पात्रता है, उन्हें यहां भी शुल्क नहीं देना होगा।
एलएन गर्ग, एसडीएम (अध्यक्ष, श्री कालभैरव
मंदिर प्रबंध समिति)
हजारों दर्शनार्थी आते हैं रोज
भगवान महाकाल दर्शन के लिए आने वाले दर्शनार्थियों में से आधे से अधिक कालभैरव मंदिर जरूर जाते हैं। भैरवगढ़ क्षेत्र स्थित श्री कालभैरव मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां भगवान कालभैरव को साक्षात मदिरा का भोग लगाया जाता है। अपनी अनूठी मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध इस मंदिर में सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 25 हजार श्रद्धालु आते हैं। वहीं शनिवार, रविवार, त्योहारों और छुट्टियों के दिनों में यह आंकड़ा 50 से 80 हजार तक पहुंच जाता है।
भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है, दर्शन के नाम पर रुपए लिए जाना गलत है। अगर शुल्क लेना है तो 200 रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए। जब महाकाल मंदिर में दर्शन शुल्क २५० रुपए है तो कालभैरव मंदिर में 500 रुपए लेने का क्या कारण है। ऐसे तो लोग मंदिरों से दूर हो जाएंगे।
महंत रामेश्वर दास
अध्यक्ष, अखाड़ा परिषद, उज्जैन
मंदिर में शुल्क की व्यवस्था उचित नहीं है। मैंने पहले भी शिकायत की थी लोग वहां वसूली करते हैं। सबसे पहले तो जांच करवानी चाहिए थी लेकिन प्रशासन ने खुद ही चार्ज लगा दिया।
मुकेश भाटी
शहर कांग्रेस अध्यक्ष
यह व्यवस्था सभी के लिए एक समान हो तो स्वागत योग्य है। मंदिर में आने वाले दर्शनार्थी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। शुल्क भी ज्यादा है, उसे आधा करें।
महेश पुजारी
अध्यक्ष, अभा पुजारी महासंघ
मंदिर में शुल्क लेने से दर्शन व्यवस्था में सुधार होगा। अगर किसी को गर्भगृह में जाकर नजदीक से दर्शन करना है तो वह रसीद कटवाकर कर सकता है। इससे अवैध वसूली रूकेगी।
शुभम घाघरे
दर्शनार्थी
कालभैरव मंदिर में लगाए गए शुल्क से व्यवस्था सुगम होगी और इससे विकास कार्यों में वृद्धि के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर समिति की ओर से अच्छी सुविधाएं मिलेंगी।
गौरव गेहलोत
दर्शनार्थी
500 रुपए काफी ज्यादा है। महाकाल मंदिर में 250 रु. की शीघ्र दर्शन व्यवस्था ठीक है। इसकी जगह नई योजनाएं बनाकर दान के लिए श्रद्धालुओं को प्रोत्साहित करें।
पं. गौरव उपाध्याय
धर्माधिकारी तीर्थ पुरोहित









