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रैकेट छोड़ प्लेयर्स कर रहे सफाई

नानाखेड़ा स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया बहुउद्देशीय खेल परिसर में मिस मैनेजमेंट

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नानाखेड़़ा स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया बहुउद्देशीय खेल परिसर इन दिनों मिस मैनेजमेंट का शिकार है। सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा खिलाडिय़ों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए दी गई इस सौगात को अधिकारी ही बट्टा लगा रहे हैं। खेल और युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले इस खेल परिसर में अव्यवस्थाओं का आलम इतना तगड़ा है कि प्रैक्टिस के लिए आने वाले प्लेयर्स को रैकेट छोड़कर पहले सफाई करनी पड़ रही है।

दरअसल, नवंबर 2024 में 11.43 करोड़ रुपए की लागत से 18 एकड़ में बने इस इनडोर खेल परिसर का लोकार्पण हुआ था जिसमें बैडमिंटन कोर्ट, टेबल टेनिस, शूटिंग, फुटबॉल ग्राउंड और जिम जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं ताकि संभागभर के खिलाडिय़ों को एक ही जगह पर ट्रेनिंग मिल सके लेकिन अधिकारी-कर्मचारियों की बंदइंतजामी से खिलाडिय़ों को दी गई यह सुविधा दुविधा बन गई है।

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खिलाड़ी करते हैं मशक्कत
सूत्रों के मुताबिक यहां के बैडमिंटन हॉल में बिछाई गई मेट कई बार सफाई नहीं होने के कारण गंदी रहती हैं। ऐसे में प्लेयर्स को प्रैक्टिस से पहले इन्हें साफ करने की मशक्कत करना पड़ती है। खिलाड़ी हाथों में बैडमिंटन रैकेट छोड़कर मॉप पकड़कर सफाई करते नजर आते हैं, जबकि यहां सफाई के लिए कर्मचारी भी है।

नहीं तो अगले माह आएं…

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खे ल परिसर में मनमाने नियम एक सूचना भी चस्पा है जो प्रवेश लेने वाले खिलाडिय़ों पर थोपा जा रहा है। चस्पा सूचना में लिखा है कि हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच सभी खेलों का पंजीयन एवं मासिक शुल्क की राशि ऑनलाइन जमा करना जरूरी है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन के लिए आने वाले खिलाडिय़ों को अगले महीने बुलाया जा रहा है। इस मनमाने नियम को ऐसे समझें कि यदि किसी खिलाड़ी को किसी माह की 15 तारीख से खेलना है तो उसका रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा रहा, उसे अगले माह की 1 तारीख को बुलाया जा रहा है।

ऐसे में उसे लंबे इंतजार के साथ परेशान होना पड़ रहा है। इसमें बैडमिंटन के कई बच्चे ऐसे भी हैं जिन्हें 5-6 साल की उम्र से ही पैरेंट्स गेम्स की ट्रेनिंग के लिए भेजना चाहते हैं लेकिन इन मनमाने नियमों के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है। पंजीयन करने वाली राखी डालसिया ने बताया कि ऐसा क्यों होता है, इसकी जानकारी तो नहीं लेकिन यह नियम बना हुआ है।

टॉयलेट गंदे, बदबू आ रही

यहां के टॉयलेट भी गंदे हैं, देखते में लगता है कि यहां की भी सफाई नहीं होती। इससे उठने वाली बदबू से भी खिलाडिय़ों को परेशानी होती है। इसके अलावा यहां टेबल टेनिस के लिए कोई कोच नहीं है। मिली जानकारी के मुताबिक सुबह 7 बजे से लक्ष्य नामक प्लेयर ही टेबल टेनिस सीखने आने वाले बच्चों को कोचिंग देता है।

इनका कहना
मैंने रिक्वेस्ट की थी कि पंजीयन की तारीख को 15 तक किया जाए लेकिन ऊपर से मना कर दिया गया। सफाई की काफी समस्या है। यहां कार्यरत सफाई कर्मचारियों व कोचेस को तीन माह से सैलरी नहीं मिली है। सफाई कर्मचारी ६ हजार रुपए में काम कर रहे हैं। जरूरत पडऩे पर नगर निगम से सफाईकर्मियों का बुलवाकर साफ-सफाई करवा देते हैं। प्लेयर्स के सफाई करने जैसी बात मेरे सामने नहीं आई है। टेबल टेनिस कोच की बात करें तो इस विद्या का प्रशिक्षण देने के लिए कोई कोच नहीं है।
– राम मिश्रा, इंजार्च, खेल परिसर

रिसीव नहीं किया कॉल
इस संबंध में जब जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी ओपी हारोड़ से चर्चा करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

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